by: vijay nandan
भोपाल: मध्य प्रदेश में लगभग दस वर्ष बाद मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल, विधानसभा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, वर्तमान व पूर्व विधायकों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी की जा सकती है। एक दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सामान्य प्रशासन एवं संसदीय कार्य विभाग वेतन-भत्ता संशोधन विधेयक प्रस्तुत करने जा रहा है। संबंधित विभागों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, मुख्यमंत्री का मासिक वेतन-भत्ता करीब दो लाख रुपये से बढ़कर लगभग 2.60 लाख रुपये होने की संभावना है। वहीं, विधायकों की वर्तमान 1.10 लाख रुपये मासिक राशि को बढ़ाकर 1.70 लाख रुपये किए जाने का सुझाव है। इसी अनुपात में विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के वेतन-भत्तों में भी बढ़ोतरी प्रस्तावित है।

समिति की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम मसौदा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बीते एक दशक में विधायकों के वेतन-भत्तों में कोई संशोधन नहीं हुआ, जबकि उनके खर्च लगातार बढ़े हैं। इस वजह से संशोधन आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी, जिसमें भाजपा के अजय विश्नोई और कांग्रेस के सचिन यादव शामिल हैं। समिति की दो बैठकों में विभिन्न राज्यों में विधायकों के वेतन-भत्तों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी संसदीय कार्य विभाग से विस्तृत जानकारी ली। अब संशोधित प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
किन पदों के वेतन-भत्ते में कितनी बढ़ोतरी की संभावना
सूत्रों के मुताबिक संभावित संशोधन के बाद मासिक वेतन-भत्ता इस प्रकार हो सकता है:
- विधायक: 1.10 लाख → 1.70 लाख रुपये
- पूर्व विधायक: 35,000 → 58,000 रुपये
- मुख्यमंत्री: 2.00 लाख → 2.60 लाख रुपये
- मंत्री: 1.70 लाख → 2.20 लाख रुपये
- राज्यमंत्री: 1.50 लाख → 2.00 लाख रुपये
- विधानसभा अध्यक्ष: 1.85 लाख → 2.20 लाख रुपये
- विधानसभा उपाध्यक्ष: 1.70 लाख → 2.00 लाख रुपये
- नेता प्रतिपक्ष: 1.70 लाख → 2.20 लाख रुपये
इस राशि में वेतन के साथ-साथ सत्कार, निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े भत्ते और दैनिक भत्ता शामिल है। प्रदेश से बाहर आधिकारिक प्रवास की स्थिति में प्रति दिन 2500 रुपये का भत्ता दिया जाता है।




