Mohit Jain
वॉशिंगटन से आई इस बड़ी खबर ने अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रवासियों के लिए एक नया नियम लागू किया है। अब किसी भी प्रवासी कर्मचारी को वर्क परमिट का ऑटोमैटिक एक्सटेंशन नहीं मिलेगा। यह नियम 31 अक्टूबर से लागू हो गया है। अब वर्क परमिट बढ़ाने के लिए हर व्यक्ति को EAD (Employment Authorization Document) प्रस्तुत करना होगा।
अब नहीं मिलेगा ऑटो एक्सटेंशन
पहले यह सुविधा थी कि जिनका वर्क परमिट खत्म होने वाला होता था, उन्हें 540 दिनों का ऑटो एक्सटेंशन मिल जाता था। इस दौरान वे बिना रुकावट काम कर सकते थे और नया परमिट बनवा सकते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अगर वर्क परमिट की अवधि खत्म हो जाती है, तो वह अपने आप आगे नहीं बढ़ेगा। यानी अगर किसी का परमिट कल खत्म हो रहा है, तो आज से ही वह वैध नहीं रहेगा।

कंपनियों पर बढ़ा दबाव
अब यह जिम्मेदारी कर्मचारियों की बजाय कंपनियों पर आ गई है। कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए नया EAD जारी करना होगा। पहले 3-4 साल के वर्कर्स को हर साल ऑटो एक्सटेंशन मिल जाता था, लेकिन अब कंपनी के जरिए ही नया डॉक्यूमेंट बनवाना होगा।
कौन नहीं होंगे प्रभावित
हालांकि, H-1B, ग्रीन कार्ड, L-1B (कंपनी ट्रांसफर), O (टैलेंट वीज़ा) या P (इवेंट बेस वीज़ा) पर अमेरिका में रहने वाले प्रवासियों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। इन श्रेणियों के वर्कर्स को पहले की तरह एक्सटेंशन मिलता रहेगा।
540 दिन का ग्रेस पीरियड भी खत्म

बाइडेन सरकार के दौरान प्रवासी वर्कर्स को 540 दिन का ग्रेस पीरियड मिलता था। इस दौरान अगर वर्क परमिट खत्म भी हो जाए तो कर्मचारी अपनी नौकरी बचाए रख सकता था या नया जॉब खोज सकता था। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने यह सुविधा भी पूरी तरह समाप्त कर दी है।
भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर
इस फैसले से लगभग चार लाख भारतीय पेशेवरों पर असर पड़ेगा। इनमें खासकर वे लोग हैं जो H-4 स्पाउस परमिट या STEM OPT पर अमेरिका में काम कर रहे हैं। अब वर्क परमिट के नवीनीकरण में थोड़ी सी भी देरी नौकरी खोने का कारण बन सकती है। इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि USCIS की मौजूदा प्रक्रिया में परमिट रिन्यूअल में तीन से बारह महीने तक का समय लग सकता है। ऐसे में हजारों भारतीयों की नौकरियां खतरे में हैं।





