BY: Yoganand Shrivastva
ग्वालियर | ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां दहेज में भैंस न मिलने पर ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग आकर एक नवविवाहिता ने तेजाब पीकर आत्महत्या कर ली। मृतका की पहचान विमलेश बघेल (21) निवासी आरोन डमौर के रूप में हुई है। घटना 21 सितंबर 2025 की है। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने पति, सास-ससुर, जेठ और जेठानी के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है।
भैंस न मिलने पर रोज सुनने पड़ते थे ताने
शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन कुछ महीनों बाद ससुराल पक्ष ने विमलेश पर दहेज में मुर्रा भैंस लाने का दबाव डालना शुरू कर दिया। आरोप है कि पति दिनेश बघेल और उसके परिजन बार-बार ताना देते थे— “तेरे भाई ने हमें भैंस तक नहीं दी।”
विमलेश के भाई महेंद्र बघेल के पास कई भैंसें हैं, इसलिए ससुराल वाले चाहते थे कि वह 1.5 से 2 लाख रुपए की मुर्रा भैंस दहेज में दे दे ताकि उनका डेयरी व्यवसाय चल सके। लेकिन जब यह मांग पूरी नहीं हुई, तो विमलेश को शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी जाने लगीं।
परेशान होकर पिया तेजाब
20 सितंबर की रात को फिर एक बार झगड़ा हुआ। गाली-गलौज और मारपीट के बाद अगले दिन विमलेश टूट गई और उसने घर में रखा तेजाब पी लिया। परिवार ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मरने से पहले विमलेश ने पुलिस के सामने बयान दर्ज कराए, जिनमें उसने साफ कहा कि उसे दहेज में भैंस की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था।
26 दिन बाद दर्ज हुई एफआईआर
विमलेश के भाई महेंद्र बघेल की शिकायत पर पुलिस ने पति दिनेश बघेल, ससुर इमरत बघेल, सास विद्या बाई, जेठ हरिसिंह और जेठानी भावना बघेल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एफआईआर मृतका के बयानों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयानों के आधार पर की गई। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।
बचपन से झेलती आई मुश्किलें
विमलेश के जीवन की शुरुआत भी संघर्षों से भरी रही। जन्म के एक साल बाद पिता का निधन और कुछ महीनों बाद मां की मौत हो गई थी। उसे उसके बड़े भाई ने पाला-पोसा, पढ़ाया और 31 जनवरी 2024 को माधौगंज निवासी दिनेश बघेल से उसकी शादी की थी।
ग्वालियर-चंबल में दहेज में ‘भैंस’ का चलन
ग्वालियर-चंबल अंचल में दूध व्यवसाय प्रमुख होने के कारण यहां भैंस की कीमत डेढ़ से दो लाख रुपए तक होती है। कई ग्रामीण इलाकों में भैंस को दहेज में देना आम प्रथा बन चुकी है। इस क्षेत्र में भैंस को सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है, जिसके चलते दहेज विवादों और हिंसा के मामलों में भैंस की मांग अक्सर सामने आती है।





