BY: Vijay Nandan
नई दिल्ली: मुंबई के 26/11 आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड तहव्वुर हुसैन राणा को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर आज भारत लाया गया। राणा का विशेष विमान दोपहर को दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर लैंड हुआ, जिसके तुरंत बाद एनआईए (NIA) ने उसे आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।
राणा को एनआईए मुख्यालय ले जाया गया, जहां मेडिकल जांच के बाद उसे पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जाएगा। एजेंसी कोर्ट से उसकी कस्टडी की मांग करेगी। एयरपोर्ट से एनआईए हेडक्वार्टर तक का रास्ता कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच तय किया गया। SWAT कमांडो, दिल्ली पुलिस की टीमें और बुलेटप्रूफ गाड़ियों की मदद से राणा को लाया गया।

क्या है मामला?
64 वर्षीय राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है और मुंबई हमले के दोषी डेविड हेडली का करीबी रहा है। साल 2008 में हुए इन हमलों में 175 लोग मारे गए थे और 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। अमेरिका की जेल में एक दशक से ज्यादा वक्त गुजार चुके राणा को भारत लाने के लिए लंबे समय से प्रयास चल रहे थे।
कैसे हुआ प्रत्यर्पण?
भारत और अमेरिका के बीच 2023 में हुए एक समझौते के तहत इस प्रत्यर्पण की राह खुली। भारत ने अमेरिका की अदालत में राणा के खिलाफ मजबूत साक्ष्य पेश किए, जिनमें कॉल रिकॉर्डिंग, उसकी लोकेशन, और लश्कर-ए-तैयबा से उसके संबंध शामिल थे। इसके बाद अमेरिकी विदेश मंत्री ने प्रत्यर्पण को मंजूरी दी। राणा की याचिकाएं अमेरिकी अदालतों से खारिज हो चुकी थीं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी पालम एयरपोर्ट पर नजर आए। वहीं, राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि “देश 26/11 की बर्बरता को नहीं भूला है” और यह कदम स्वागत योग्य है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने मांग की कि राणा को फांसी दी जाए लेकिन इस मुद्दे पर राजनीति न हो।
क्या होगा आगे?
सूत्रों के मुताबिक, राणा को तिहाड़ जेल भेजे जाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। एनआईए लंबी कस्टडी की मांग कर सकती है ताकि उससे पूछताछ की जा सके। इस केस में सरकार ने स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नरेंद्र मान की नियुक्ति की है, जो कोर्ट में एनआईए का पक्ष रखेंगे।
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