रिपोर्टर: अनूप विश्वास
भारत 21वीं सदी में विश्व गुरु बनने की राह पर है, मगर जमीनी सच्चाई की तस्वीरें आज भी दिल दहला देती हैं। छत्तीसगढ़ के प्रतापपुर विकासखंड के ग्राम गोरगी से ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां कोडाकु जनजाति के एक बीमार व्यक्ति को परिजनों ने एंबुलेंस या वाहन न मिलने पर कंधे पर उठाकर कई किलोमीटर दूर अस्पताल तक पहुंचाने की कोशिश की। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों के मन में सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर विकास की दौड़ में गांव और वनांचल क्यों पीछे छूट रहे हैं।
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एंबुलेंस न आई, सड़कें न बनीं – मजबूरी में उठाया कंधा
- बीमार होने पर परिजनों ने एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की, लेकिन वह गांव तक नहीं पहुंची।
- सड़कें न होने की वजह से वाहन भी गांव तक नहीं आ सकते।
- ऐसे में परिजनों ने मजबूरी में बीमार को कंधे पर उठाकर दुर्गम रास्तों से अस्पताल की ओर रवाना किया।
पीड़ा और सवालों से भरी तस्वीर
सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो सिर्फ एक बीमार व्यक्ति की मजबूरी नहीं है, बल्कि हजारों ग्रामीणों की हकीकत है।
- पसीने से तर-बतर चेहरे और कांपते कंधे यह बताने के लिए काफी हैं कि हालात कितने कठिन हैं।
- उम्मीद सिर्फ इतनी थी कि किसी तरह अस्पताल तक पहुंच जाएं और समय रहते इलाज मिल जाए।
क्या यही विकास की तस्वीर है?
प्रतापपुर की यह घटना प्रशासन और सिस्टम की पोल खोल रही है।
- स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी आज भी वनांचल और दुर्गम इलाकों की सबसे बड़ी समस्या है।
- सवाल यह है कि क्या एक सभ्य समाज में लोगों को अपनी जान बचाने के लिए इस तरह की अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना चाहिए?
- आखिरकार जवाबदेही कौन लेगा – प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग या फिर जनप्रतिनिधि?





