BY
Yoganand Shrivastava
ईडी और बंगाल सरकार के बीच आमने-सामने की दलीलें
West Bengal : पश्चिम बंगाल में IPAC पर हुई प्रवर्तन निदेशालय की रेड को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। ईडी की याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के बीच जोरदार बहस देखने को मिली। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं छापे के दौरान मौके पर पहुंचीं और जांच में बाधा डाली। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस ने राजनीतिक दबाव में काम किया और पीएमएलए कानून के तहत चल रही कार्रवाई को प्रभावित किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी, डीजीपी और कमिश्नर को भेजा नोटिस
West Bengal लंबी बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी और पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। अदालत ने टिप्पणी की कि जांच एजेंसियों के काम में दखल का आरोप गंभीर है और इसकी गहराई से जांच जरूरी है।

बंगाल सरकार का पलटवार, आरोपों को बताया गलत
West Bengal पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और कल्याण बनर्जी ने ईडी के आरोपों को निराधार बताया। सिब्बल ने कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है और मुख्यमंत्री द्वारा जांच में किसी तरह की बाधा नहीं डाली गई। उन्होंने दावा किया कि जब्ती की प्रक्रिया कानून के तहत हुई और लगाए गए आरोप पंचनामा से मेल नहीं खाते। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।





