सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून में संशोधन के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान संसदीय संयुक्त समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कानून में कोई त्रुटि पाई गई, तो वे संसदीय पद से त्यागपत्र दे देंगे। यह टिप्पणी उन्होंने आजतक के साथ एक विशेष बातचीत में की।
राजनीतिक दलों पर तुष्टिकरण का आरोप
पाल ने विभिन्न राजनीतिक दलों पर मुस्लिम वोट बैंक के लिए तुष्टिकरण की नीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ कानून में संशोधन पूरी निष्पक्षता से किए गए हैं और इसमें किसी धार्मिक पक्षपात की गुंजाइश नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक
इस बीच, सर्वोच्च न्यायालय ने वक्फ कानून के संशोधन पर सात दिनों के लिए अंतरिम रोक लगा दी है। इस दौरान वक्फ बोर्ड में नई नियुक्तियाँ नहीं की जाएंगी और किसी भी संपत्ति को डिनोटिफाई नहीं किया जाएगा।
हिंदू सदस्यों की नियुक्ति पर विवाद
याचिकाकर्ताओं ने वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को चुनौती दी है। इस पर जगदंबिका पाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों के अनुसार, वक्फ बोर्ड एक कानूनी संस्था है, न कि धार्मिक। इसलिए, इसमें सभी समुदायों के लोगों को शामिल किया जा सकता है।
जेपीसी की 38 बैठकों का दावा
पाल ने दावा किया कि इस मुद्दे पर जेपीसी ने 38 बैठकें की हैं और सभी आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक ताकतें लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रही हैं।
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