BY: Yoganand Shrivastva
उज्जैन, बड़नगर में एक दिल दहला देने वाली घटना में तीन साल के बच्चे की मौत हो गई है। घटना 29 जून की है जब एक पिता ने अपनी पत्नी से मामूली विवाद के चलते अपने मासूम बेटे को गुस्से में सड़क पर पटक दिया था। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गए बच्चे की बुधवार रात उपचार के दौरान मौत हो गई। अब इस मामले में पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ हत्या की धारा (IPC 302) में मामला दर्ज कर लिया है।
पत्नी के घूंघट न करने से भड़का था पिता
पुलिस के अनुसार, उमरिया गांव के निवासी आजाद शाह और उसकी पत्नी मुस्कान के बीच पारिवारिक विवाद चल रहा था। 29 जून की शाम दोनों बड़नगर थाने में शिकायत दर्ज कराने के बाद घर लौट रहे थे। रास्ते में बारिश होने लगी, तो आजाद ने अपने बेटे तनवीर को गोद में उठा लिया। जैसे ही वे चौपाटी पहुंचे, सामने से कुछ परिचित लोग आते दिखाई दिए। इस पर आजाद ने मुस्कान से सिर पर घूंघट डालने को कहा। मुस्कान के इनकार पर दोनों में कहासुनी हो गई और आजाद ने गुस्से में आकर बेटे को जमीन पर पटक दिया।
घटना के बाद गिरफ्तारी, बच्चे की हालत थी नाज़ुक
स्थानीय लोगों ने यह दृश्य देखकर आजाद को पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी। वहीं घायल तनवीर को पहले बड़नगर अस्पताल, फिर उज्जैन जिला अस्पताल और बाद में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान बुधवार देर रात उसकी मौत हो गई।
पहले गैर-इरादतन अपराध, अब हत्या का केस
मामले में पहले आजाद के खिलाफ गैर-इरादतन अपराध (धारा 109 और अन्य) के तहत मामला दर्ज हुआ था और उसे जेल भेज दिया गया था। लेकिन अब बच्चे की मौत होने के बाद धारा 302 (हत्या) जोड़ दी गई है।
थाना प्रभारी अशोक पाटीदार के मुताबिक, मुस्कान ने पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी और बताया था कि आजाद ने जानबूझकर बेटे को पटका जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। अब इस गंभीर मामले में आरोपी पर हत्या का मुकदमा चलेगा।
स्थानीय लोगों की सतर्कता से तुरंत पकड़ा गया आरोपी
घटना के दौरान एक ढाबा संचालक पीयूष मोरवाल ने तत्परता दिखाते हुए आजाद को मौके पर ही पकड़ लिया था और पुलिस को सौंप दिया था। फिलहाल आरोपी जेल में है और पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है।
एक मासूम की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि पिता को पत्नी का घूंघट न करना नागवार गुज़रा। यह घटना न केवल परिवारिक हिंसा की भयावहता को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि घरेलू अहंकार किस हद तक अमानवीय हो सकता है। अब न्याय की उम्मीद में मृतक के परिजन और समाज, आरोपी को उसके कृत्य की सजा मिलने का इंतजार कर रहे हैं।





