रिपोर्टर: विशाल दुबे
Ujjain : विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि 2026 का महापर्व अद्वितीय वैभव के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष बाबा महाकाल का आंगन न केवल आस्था की खुशबू से, बल्कि सात समंदर पार से आए दुर्लभ विदेशी फूलों की महक से भी सराबोर है। रविवार रात 2:30 बजे मंदिर के पट खुलते ही महाकाल की नगरी शिवमय हो गई है।

सिंगापुर से स्विट्जरलैंड तक: 40 प्रजातियों के फूलों से बनी ‘नटराज’ थीम
Ujjain : इस बार महाकाल मंदिर की सजावट का आकर्षण सात समंदर पार तक फैला है। बेंगलुरु के 200 से अधिक कुशल कलाकारों ने सिंगापुर, हांगकांग, स्विट्जरलैंड, थाईलैंड और इंडोनेशिया से विशेष रूप से मंगाए गए 40 से अधिक प्रजातियों के विदेशी फूलों से मंदिर को सजाया है। कर्नाटक के कृष्णमूर्ति रेड्डी के नेतृत्व में इस वर्ष की सजावट दक्षिण भारत के प्रसिद्ध नटराज मंदिर की थीम पर आधारित है, जो भगवान शिव के तांडव स्वरूप को दर्शाती है। गर्भगृह से लेकर नंदी हॉल तक हर कोना इन प्राकृतिक रंगों और सुगंध से महक रहा है।

Ujjain 44 घंटे तक खुले रहेंगे पट: भस्म आरती से शुरू हुआ महापर्व
Ujjain : महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में बाबा महाकाल के पट रविवार रात 2:30 बजे खोल दिए गए, जिसके बाद भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। परंपरा के अनुसार, मंदिर के कपाट लगातार 44 घंटों (16 फरवरी की रात 11 बजे तक) के लिए खुले रहेंगे, ताकि देशभर से उमड़ने वाले लाखों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन कर सकें। भस्म आरती के दौरान बाबा को भांग, चंदन और त्रिपुंड से विशेष ‘राजा स्वरूप’ में सजाया गया। 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे साल में एक बार होने वाली विशेष ‘दोपहर की भस्म आरती’ भी आयोजित की जाएगी।

10 लाख श्रद्धालुओं का सैलाब और व्यापक सुरक्षा प्रबंध
Ujjain : प्रशासन का अनुमान है कि इस महापर्व पर 10 लाख से अधिक श्रद्धालु उज्जैन पहुँच रहे हैं। भीड़ के सुगम प्रबंधन के लिए इंदौर के कलाकारों द्वारा बनाई गई भव्य रंगोलियाँ और नटराज थीम की सजावट भक्तों को मंत्रमुग्ध कर रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, पार्किंग और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। महोत्सव का विधिवत समापन 18 फरवरी को पंचमुखारविंद दर्शन के साथ होगा।






