BY: Yoganand Shrivastva
इंदौर: जिला कोर्ट ने इंदौर के दो डॉक्टरों को प्री-कंसेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक (PCPNDT) एक्ट के उल्लंघन के मामले में एक-एक साल की कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोनों को एक्ट की एक अन्य धारा के तहत 3-3 महीने की अतिरिक्त कैद और 6-6 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला 14 साल पुराना है।
मामला कैसे सामने आया
1 जून 2011 को इंदौर के अखबारों में एक खबर प्रकाशित हुई थी जिसमें एक महिला की सोनोग्राफी जांच में गड़बड़ियों का उल्लेख था। उस महिला ने बाद में आत्महत्या कर ली। यह खबर जिला प्रशासन के ध्यान में आई और तत्कालीन एडीएम नारायण पाटीदार ने पुलिस अधिकारियों से जानकारी मांगी कि महिला ने किस सेंटर पर सोनोग्राफी कराई थी।
7 जून 2011 को डीएसपी मुख्यालय ने जानकारी दी कि महिला ने स्नेह नगर स्थित आइडियल मेडिकल सेंटर में सोनोग्राफी कराई थी। इसके बाद 11 जून 2011 को जिला प्रशासन ने सेंटर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सेंटर के डायरेक्टर डॉ. राजू प्रेमचंदानी और डॉ. अजय मोदी उपस्थित थे। निरीक्षण में सोनोग्राफी रजिस्टर और दस्तावेजों की जांच की गई और पंचनामा तैयार किया गया।
जांच में मिली गड़बड़ियाँ
जांच में पता चला कि सेंटर PCPNDT एक्ट के तहत पंजीकृत था। नियमों के अनुसार हर माह की 5 तारीख तक गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी रिपोर्ट और फॉर्म-F सक्षम प्राधिकारी के पास जमा करना अनिवार्य है।
लेकिन निरीक्षण में यह पाया गया कि:
- गर्भवती महिलाओं के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर गायब थे।
- फॉर्म-F नंबर 68, 71, 79 पर हस्ताक्षर नहीं किए गए।
- डॉ. राजू प्रेमचंदानी ने फॉर्म-F नंबर 103–126 तक के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं किए।
इसके बाद एडीएम ने सेंटर को कारण बताओ नोटिस जारी किया। 23 जून 2011 को दोनों डॉक्टरों ने जवाब पेश किया। 24 जून 2011 को गठित जिला सलाहकार समिति की बैठक में यह पाया गया कि डॉ. अजय मोदी ने महिला की जांच की थी, लेकिन PCPNDT एक्ट के तहत फॉर्म-F सही ढंग से नहीं भरा गया।
कोर्ट की प्रक्रिया
25 सितंबर 2011 को प्रशासन ने कोर्ट में परिवाद दायर किया। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों की जांच के बाद 23 जून 2017 को आरोप तय किए गए। इसमें 9 प्रमुख गवाहों के बयान और दस्तावेज पेश किए गए, जिनमें शामिल थे:
- आईएएस अधिकारी, अपर कमिश्नर (राजस्व), कार्यकारी डायरेक्टर
- डीएसपी, स्वास्थ्य विभाग के रिटायर्ड डायरेक्टर
- उप सचिव (मप्र शासन)
- PCPNDT एक्ट से जुड़े आदेश, नोटिस, पंचनामा, सोनोग्राफी रिपोर्ट, फॉर्म-F रिकॉर्ड, सेंटर का पंजीयन सर्टिफिकेट, रैफरल स्लिप, मशीन सील पंचनामा और भुगतान रसीदें।
दोष और सजा
कोर्ट ने पाया कि दोनों डॉक्टरों ने PCPNDT एक्ट की धारा 23 और 25 का उल्लंघन किया है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि यह उनका पहला अपराध है, इसलिए न्यूनतम सजा दी जाए। अभियोजन पक्ष ने सख्त कार्रवाई की मांग की।
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह अपराध गंभीर है और समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए दोषियों को कठोर दंड देना न्यायोचित है। अंततः दोनों डॉक्टरों को एक-एक साल की कैद, 3-3 महीने की अतिरिक्त कैद और 6-6 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
घटना का महत्व
यह मामला स्पष्ट करता है कि PCPNDT एक्ट का उल्लंघन गंभीर अपराध है और स्वास्थ्य पेशेवरों को कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना अनिवार्य है। 14 साल बाद भी यह फैसला समाज में संदेश देता है कि नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।





