BY: Yoganand Shrivastva
ग्वालियर। दिवाली की रात डाक विभाग के कर्मचारी बसंत भारद्वाज के घर में हुई कथित 45 लाख रुपये की चोरी का मामला पूरी तरह फर्जी निकला। पुलिस ने बुधवार को इस मामले का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनकी पूछताछ में सच्चाई सामने आई। अब पुलिस बसंत भारद्वाज के खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की तैयारी कर रही है। घटना दर्पण कॉलोनी की है। 20 अक्टूबर की रात बसंत अपने परिवार के साथ गांव चले गए थे, जबकि उनकी पत्नी मायके में थीं। इसी दौरान घर में चोरी की वारदात हुई। दो दिन बाद लौटकर बसंत ने थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उनके और उनके भाई के घर से 45 लाख रुपये के गहने और नकदी चोरी हो गई।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और मुखबिर की सूचना पर रघु उर्फ राघवेंद्र आदिवासी और छोटू उर्फ सोनू साहू नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने बताया कि उन्हें घर से सिर्फ 30 हजार रुपये नकद और करीब 2 लाख रुपये के गहने मिले थे। उन्होंने 45 लाख की चोरी के दावे को पूरी तरह गलत बताया।
चोरों ने बसंत के घर के अलावा एक अन्य मकान — मंजू गौर के घर में भी चोरी करने की बात कबूल की।जब पुलिस ने बसंत भारद्वाज से सख्ती से पूछताछ की, तो उन्होंने सच्चाई स्वीकार कर ली। उन्होंने शपथ पत्र देकर कहा कि चोरी की गई संपत्ति की कीमत 45 लाख नहीं थी। दरअसल, उनकी पत्नी अपने मायके गहने लेकर गई थीं, और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी। इसी गलतफहमी में उन्होंने पुलिस को झूठी जानकारी दे दी।
थाटीपुर थाना प्रभारी विपेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि बसंत भारद्वाज ने एफआईआर में 38 तोला सोना और तिजोरी चोरी होने का दावा किया था। जांच के दौरान जब सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्य खंगाले गए, तो दो संदिग्धों की पहचान हुई। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने तिजोरी को जंगल में तोड़ने और उसमें मिले सामान को आपस में बांटने की बात कबूल की।पुलिस अब झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने के आरोप में फरियादी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।





