हैदराबाद के पास कंचा गाचीबोवली क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तेलंगाना सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था और सरकार से जवाब मांगा।
अदालत की सख्ती:
अदालत ने सरकार से पूछा, “क्या पेड़ काटने की अनुमति संबंधित अधिकारियों से ली गई थी? हमें सिर्फ पर्यावरण की चिंता है, दर्शकों की नहीं।” अदालत ने यह भी कहा कि हम यह नहीं देख रहे कि इस परियोजना से कितनी नौकरियां मिलेंगी या उसका मूल्य क्या है – सबसे पहले हमें पर्यावरण की बहाली चाहिए।
100 करोड़ के जंगल पर चला बुलडोजर:
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि करीब ₹100 करोड़ की वन भूमि को भारी मशीनों से साफ कर दिया गया। अदालत ने पूछा, “तीन दिन की छुट्टियों में इतनी जल्दी क्या थी?” सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि क्या आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं।
सरकार का जवाब:
तेलंगाना सरकार की ओर से पेश हुए सीनियर वकील एएम सिंघवी ने बताया कि यह प्रक्रिया 2024 में ही शुरू हो गई थी और अब इसे गलत ढंग से ताज़ा मामला बताया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ज्यादातर मामलों में उचित अनुमति ली गई थी।
अदालत की चेतावनी:
कोर्ट ने सरकार से साफ कहा – “अगर पर्यावरण की बहाली की योजना नहीं लाए तो फिर हमें नहीं पता कितने अधिकारियों को जेल भेजना पड़ेगा।” अदालत ने व्यंग्य में कहा – “वहां नदी किनारे एक अस्थायी जेल बनवा लो ताकि अधिकारी कुछ महीने आराम से रह सकें।”
सहायक न्याय मित्र (Amicus Curiae) का बयान:
अदालत द्वारा नियुक्त स्वतंत्र सलाहकार ने बताया कि सरकार ने ‘स्व-प्रमाणन’ का तरीका अपनाया है और सारा क्षेत्र एक निजी पार्टी को सौंपने की योजना है। उन्होंने मुख्य सचिव से हलफनामा दाखिल करने की मांग की।
निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा – “हमें सिर्फ पर्यावरण की चिंता है, ना कि प्रोजेक्ट वैल्यू या मोर्टगेज की। पहले बताइए कि इस तबाही की भरपाई कैसे होगी।”





