क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के एक अधिकारी को जमकर फटकार लगाई क्योंकि उसने 2013 के हाई कोर्ट के आदेश को नजरअंदाज करते हुए हैदराबाद की झुग्गियों को गिरवा दिया। कोर्ट ने कहा, “आप 80 पुलिसकर्मियों को लेकर कोर्ट के आदेश को तोड़ने गए? आपने जानबूझकर आदेश की अवहेलना की?”
जस्टिस बीआर गवई (जो अगले महीने चीफ जस्टिस बनने वाले हैं) की अगुवाई वाली बेंच ने साफ कहा—“अगर कोई हाई कोर्ट की गरिमा के साथ खेल रहा है, तो हम उसे तुरंत गिरफ्तार कर लेंगे। क्या यह अधिकारी खुद को हाई कोर्ट से ऊपर समझता है?”
अधिकारी ने क्या कहा?
- अधिकारी ने जमानत की गुहार लगाई, कहा—“मेरे दो बच्चे हैं… अगर मैं 48 घंटे से ज्यादा जेल में रहा, तो नौकरी चली जाएगी।”
- उसका वकील बोला—“अब वह सरकार के प्रोटोकॉल डायरेक्टर हैं…”
कोर्ट का जवाब:
- “जिन बच्चों के घर उसने तोड़े, उनके बारे में क्यों नहीं सोचा? उसे जेल में रहकर सरकारी मेहमाननवाजी का आनंद लेना चाहिए!”
- “अगर वह चाहे, तो हम उसे फिर से तहसीलदार बना दें!”
हालांकि, कोर्ट ने अंत में याचिका सुनने पर सहमति जताई।





