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किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

State government is committed to ensure fair price to farmers for their crops: Chief Minister Dr. Yadav

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की बेहतरी के लिये सभी क्षेत्रों में कार्य कर रही है। सरकार ने किसानों के हित में निर्णय लेते हुए ष्मकालीन मूंग एवं उड़द को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन किये जाने संबंधी निर्णय लेकर प्रस्ताव केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भेजा है। किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग एवं उड़द के उपार्जन के लिये किसानों का पंजीयन 19 जून से प्रारंभ होगा। इस संबंध में संबंधित विभाग एवं एजेंसियों को निर्देश जारी कर दिये गये हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिये कृषि आधारित उद्योग लगाने में भी मदद कर रही है। किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने के लिये प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान संघों से हुई चर्चा में आश्वस्त किया कि हम सब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य की बेहतरी के लिये डबल इंजन की सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सरकार किसानों को अगली फसल के लिये भी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उन्नत बीज और उन्नत कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिये प्रदेश में निरंतर कृषि मेलों का आयोजन कर रही है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य

कृ‍षि लागत एवं मूल्य आयोग भारत सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8682 रूपये प्रति क्विंटल और उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7400 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। राज्य किसान कल्याण एवं कृषि विभाग द्वारा केन्द्र को भेजे गये प्रस्ताव में किसानों का पंजीयन, उपार्जित फसल की गुणवत्ता, परिवहन, भुगतान के साथ प्रचार-प्रसार की कार्य-योजना भी प्रेषित की गई है।

36 जिलों में मूंग और 13 जिलों में उड़द

प्रदेश के 36 जिलों में मई माह के तृतीय सप्ताह से जून माह के प्रथम सप्ताह तक मूंग फसल कटाई और प्रदेश के 13 जिलों में मई माह के तृतीय सप्ताह से जून माह के प्रथम सप्ताह तक उड़द फसल की कटाई की जाती है। प्रदेश में मूंग का संभावित क्षेत्राच्छादन 14.35 लाख हेक्टेयर, संभावित उत्पादन 20.23 लाख मीट्रिक टन है। इसी प्रकार उड़द का संभावित क्षेत्राच्छादन 0.95 लाख हेक्टेयर, संभावित उत्पादन 1.24 लाख मीट्रिक टन है।

एमएसपी पर पंजीयन प्रक्रिया

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जित की जाने वाली मूंग एवं उड़द के लिये संबंधित किसानों को पंजीयन के लिये किसान की फसल का नाम, आधार नंबर, बैंक खाता नंबर, आईएफसी कोड सहित भूअधिकार ऋण पुस्तिका की स्व-प्रमाणित छायाप्रति संलग्न करना होगी। बैंक खाता राष्ट्रीयकृत बैंक एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की शाखा का होना अनिवार्य है। सिकमी/बटाई काश्तकार को पंजीयन के लिये आवेदन के साथ सिकमी के अनुबंध की स्व-प्रमाणित प्रति संलग्न करना होगी।

किसानों से ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द की उपार्जित मात्रा के भुगतान के लिये कम्प्यूटराईज प्रिंटेड रसीर उपार्जन करने वाली संस्था द्वारा प्रदाय की जायेगी जिसमें किसान का नाम, बैंक खाता क्रमांक तथा भुगतान योग्य राशि का विवरण होगा। इस रसीद पर उपार्जन केन्द्र प्रभारी के हस्ताक्षर भी किये जायेंगे।

समर्थन मूल्य पर उपार्जित मूंग-उड़द की एक समान विनिर्दिष्टियां भारत सरकार, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा रबी विपणन वर्ष 2025-26 के लिये केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित एक समान विनिर्दिष्टियां के अनुरूप किया जायेगा। इसके अनुसार ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द के उपार्जन करने की जिम्मेदारी संबंधित उपार्जन करने वाली सहकारी संस्थाओं की होगी। निर्धारित मापदण्ड अनुसार उपार्जन सुनिश्चित करने के लिये सहकारी संस्थाओं/मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपण संघ मर्यादित भोपाल/म.प्र. वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कार्पोरेशन, खाद्य, कृषि, सहकारिता एवं राजस्व विभाग के मैदानी अमले को ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द की गुणवत्त हेतु जिला स्तर पर प्रशिक्षित किया जायेगा। साथ ही किसानों के हित में समर्थन मूल्य पर ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द उपार्जन की कीमत एवं समान विनिर्दिष्टियां का व्यापार प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिससे किसानों का ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द विचौलियों द्वारा कम दाम पर खरीदा न जा सके।

उपार्जित फसल का परिवहन

उपार्जन केन्द्र से गोदाम तक मूंग-उड़द परिवहन करने के लिये परिवहनकर्ताओं की नियुक्ति एवं अनुबंध की कार्रवाई की जायेगी। उपार्जन केन्द्र पर प्रतिदिन उपार्जन मात्रा की समीक्षा भी होगी। ई-उपार्जन साफ्टवेयर के माध्यम से ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द के परिवहन के लिये जारी रसीद पर परिवहनकर्ता की प्राप्ति कर उसे मूंग-उड़द सौंपा जायेगा। किसी कारणों से एजेंसियों द्वारा नियुक्त परिवहनकर्ता परिवहन करने में विफल होता है तो वैकल्पिक व्यवस्था जिला स्तरीय समितियों द्वारा की जायेगी। परिवहनकर्ता द्वारा विलम्ब से परिवहन करने पर उसके विरूद्ध नियमानुसार उपार्जन एजेंसियों द्वारा पेनाल्टी लगाई जायेगी।

उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के‍लिये सुविधाएं

उपार्जन केन्द्रों पर किसानों की सुविधा के लिये व्यवस्था उपार्जन समिति होगी, जो केन्द्र पर किसानों के बैठने के लिये छायादार स्थान, साफ पीने के पानी, शौचालय एवं फर्स्ट बॉक्स सुविधा उपलब्ध करायेगी। उपार्जन किये जाने वाले खाद्यान की गुणवत्ता परीक्षण के लिये आवश्यक उपकरण की व्यवस्था भी होगी। इसके लिये विस्तृत परीक्षण भी दिया जायेगा। उपार्जन केन्द्र पर एक बैनर लगाया जायेगा, जिसमें केन्द्र का नाम, एफएक्यू गुणवत्ता का मापदण्ड और भुगतान का उल्लेख होगा। जिन उपार्जन केन्द्रों पर अत्यधिक खरीदी की संभावना होगी, उन केन्द्रों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था की जायेगी। साथ ही निर्धारित केन्द्रों पर लैपटॉप, प्रिन्टर, बैटरी आदि को चालू अवस्था में रखा जायेगा।

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