Sheopur बेमौसम ओलावृष्टि ने श्योपुर के किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में बिछी सफेद चादर ने न केवल फसलों को नष्ट किया है, बल्कि अन्नदाता के भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं। इसी आर्थिक तबाही और प्रशासन की सुस्ती के विरोध में सोमवार को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी कड़ा रुख अख्तियार किया।
Sheopur हाईवे पर अर्धनग्न प्रदर्शन और चक्काजाम
किसानों के प्रति अपनी एकजुटता दिखाने के लिए क्षेत्रीय विधायक बाबू जंडेल और पूर्व लोकसभा प्रत्याशी नीटू सिंह सिकरवार ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। दोनों नेता अर्धनग्न होकर शिवपुरी रोड पर धरने पर बैठ गए। इस प्रदर्शन के चलते शिवपुरी हाईवे पर करीब आधे घंटे तक वाहनों के पहिए थमे रहे, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि जब तक किसान को न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रहेगा।
Sheopur कलेक्ट्रेट का घेराव और आक्रोश रैली
पटेल चौक से शुरू हुई यह आक्रोश रैली कलेक्ट्रेट पहुँचते-पहुँचते एक विशाल जनसमूह में बदल गई। किसान नेता जसवंत सिंह और राधेश्याम मुंडला के मार्गदर्शन में बड़ी संख्या में किसानों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। किसानों ने व्यथा सुनाई कि प्राकृतिक आपदा ने उनकी खड़ी फसल को पूरी तरह चौपट कर दिया है, जिससे वे कर्ज के बोझ तले दबने को मजबूर हैं।
Sheopur प्रशासन का आश्वासन और ज्ञापन
बढ़ते तनाव को देखते हुए जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। विधायक और किसान नेताओं ने उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें दो प्रमुख मांगें रखी गईं:
- त्वरित सर्वे: प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राजस्व टीम भेजकर नुकसान का आकलन।
- सम्मानजनक मुआवजा: फसल क्षति के आधार पर किसानों को शीघ्र आर्थिक राहत। कलेक्टर द्वारा सर्वे और उचित कार्यवाही का ठोस भरोसा दिए जाने के बाद ही किसानों ने जाम खोला और धरना समाप्त किया।





