भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने स्टॉक एक्सचेंजों को इंडेक्स डेरिवेटिव्स पर इंट्राडे पोजीशन लिमिट की निगरानी के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह नियम 1 अप्रैल 2025 से लागू होंगे, हालांकि, अभी इन सीमाओं का उल्लंघन करने पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।
क्या हैं नए नियम?
- एक्सचेंजों को ट्रेडिंग दिवस के दौरान कम से कम 4 बार पोजीशन की रैंडम जांच करनी होगी।
- इन जांचों का समय पहले से तय विंडो के भीतर ही रखा जाएगा।
- एक्सचेंज चाहें तो जांच की संख्या बढ़ा सकते हैं, लेकिन कम से कम 4 स्नैपशॉट्स अनिवार्य हैं।
SEBI ने कहा, “इंट्राडे पोजीशन लिमिट का उल्लंघन होने पर अभी कोई दंड नहीं दिया जाएगा और इसे उल्लंघन नहीं माना जाएगा।”
उद्योग की चिंताएं और SEBI की प्रतिक्रिया
फरवरी में, SEBI ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) मार्केट की जोखिम प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने के लिए कुछ प्रस्ताव रखे थे, जिसमें रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डेल्टा-आधारित पोजीशन लिमिट शामिल थे। हालांकि, ब्रोकर्स और निवेशकों ने इन नियमों को लागू करने में तकनीकी चुनौतियों का हवाला दिया।
SEBI ने माना कि नए सिस्टम लागू होने तक मार्केट प्रतिभागियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, इसलिए जुर्माने को टाल दिया गया है।
इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए नई पोजीशन सीमाएं
- इंडेक्स ऑप्शंस:
- इंट्राडे लिमिट: ₹1,000 करोड़ (नेट), ₹2,500 करोड़ (ग्रॉस)
- एंड-ऑफ-डे लिमिट: ₹500 करोड़ (नेट), ₹1,500 करोड़ (ग्रॉस)
- इंडेक्स फ्यूचर्स:
- इंट्राडे लिमिट: ₹2,500 करोड़
- एंड-ऑफ-डे लिमिट: ₹1,500 करोड़ (पहले ₹500 करोड़ थी)
ये सीमाएं सभी निवेशकों पर लागू होंगी, चाहे वे FPIs हों, म्यूचुअल फंड्स हों या रिटेल ट्रेडर्स।
REITs और InvITs के लिए फास्ट-ट्रैक FPO नियम
SEBI ने रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) और इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) के लिए फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) की प्रक्रिया को आसान बनाया है।
- स्पॉन्सर्स को जारी किए गए यूनिट्स पर 3 साल का लॉक-इन (15% यूनिट्स) और 1 साल का लॉक-इन (बाकी यूनिट्स) लागू होगा।
- FPO के लिए स्टॉक एक्सचेंज से अनुमति लेनी होगी और SEBI को डॉक्यूमेंट्स जमा करने होंगे।
ये नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
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