भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा संचालित मनी लॉन्ड्रिंग केस में आज एक बड़ा फैसला आने वाला है। विशेष न्यायाधीश सचिन कुमार घोष की अदालत आरटीओ के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा और उनके सहयोगी शरद जायसवाल की जमानत याचिकाओं पर आज अपना निर्णय सुनाएगी।
केस का बैकग्राउंड
- ED ने सौरभ शर्मा के खिलाफ करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है।
- एजेंसी का दावा है कि उनके पास से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे, जो एक इनोवा कार में छिपाए गए थे।
- 8 अप्रैल को ED ने कोर्ट में चार्जशीट (आरोपपत्र) पेश किया, जिसमें 12 आरोपियों को शामिल किया गया, जिनमें सौरभ के परिवार के सदस्य और उनकी कंपनियों के निदेशक भी शामिल हैं।
अब तक क्या हुआ?
- 9 अप्रैल को सौरभ की मां, पत्नी, जीजा और साले को 10 लाख रुपये के मुचलके पर जमानत मिली थी।
- हालांकि, सौरभ और शरद जायसवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था, जो आज आएगा।
- अगर जमानत नहीं मिलती, तो अगली सुनवाई 5 मई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी।
लोकायुक्त पुलिस का रोल
इससे पहले, लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की, जिसके चलते सौरभ, शरद और एक अन्य आरोपी चेतन सिंह गौर को जमानत मिल गई थी। लेकिन, ED ने बाद में केस संभाला और तेजी से कार्रवाई करते हुए चार्जशीट दाखिल कर दी।
आज का फैसला क्यों अहम है?
- अगर जमानत मिलती है, तो सौरभ और शरद जेल से बाहर आ सकते हैं।
- अगर जमानत नहीं मिलती, तो उन्हें 5 मई तक जेल में ही रहना होगा।
- ED का दावा है कि सौरभ के पास मिली संपत्ति अवैध है, जबकि आरोपी पक्ष का कहना है कि यह केस राजनीतिक दबाव में चलाया जा रहा है।
क्या होगा आगे?
आज का फैसला इस केस की दिशा तय करेगा। अगर जमानत मिलती है, तो ED अपील कर सकती है। वहीं, अगर जमानत नहीं मिलती, तो आरोपी पक्ष उच्च न्यायालय का रुख कर सकता है।
नोट: यह केस मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार और काले धन की जांच से जुड़े बड़े मामलों में से एक है। ED की कार्रवाई से साफ है कि एजेंसी इस केस को गंभीरता से ले रही है।





