Report: Avinash Shrivastava
Sasaram मगध साम्राज्य के महान शासक और शांति के अग्रदूत सम्राट अशोक की जयंती आज सासाराम में पूरी भव्यता और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर शहर के बेदा सूर्य मंदिर से लेकर धर्मशाला मोड़ तक एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में अनुयायी और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।
Sasaram धर्मशाला मोड़ पर भव्य प्रतिमा का अनावरण
समारोह का सबसे ऐतिहासिक क्षण तब आया जब सासाराम की मेयर काजल कुमारी ने धर्मशाला मोड़ पर सम्राट अशोक की नवनिर्मित प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया। पुष्प वर्षा और जयकारों के बीच मेयर ने इस प्रतिमा को शहर की गौरवशाली विरासत का प्रतीक बताया।
Sasaram शक्ति और करुणा का संदेश: उपेंद्र कुशवाहा
शोभायात्रा में विशेष रूप से शामिल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने सम्राट अशोक के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
“सम्राट अशोक केवल भारत के ही नहीं, बल्कि विश्व इतिहास के सबसे महान शासक थे। कलिंग युद्ध के बाद हिंसा का मार्ग त्यागकर उन्होंने करुणा, न्याय और मानवता का जो संदेश दिया, वह आज के अशांत विश्व के लिए सबसे बड़ी औषधि है।”
कुवाहा ने युवाओं का आह्वान किया कि वे अशोक के ‘धम्म’ यानी नैतिक मूल्यों और सामाजिक समानता के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारें ताकि एक बेहतर राष्ट्र का निर्माण हो सके।
Sasaram उत्सवमय हुआ सासाराम
- भव्य शोभायात्रा: बेदा सूर्य मंदिर से शुरू हुई यात्रा का पूरे मार्ग में स्थानीय संगठनों और समाजसेवियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया।
- सांस्कृतिक विरासत: मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई और सम्राट अशोक के शासनकाल की उपलब्धियों, जैसे स्तूपों और शिलालेखों के महत्व को याद किया गया।
- समापन: कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ।





