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सऊदी अरब के Riyadh Airport पर फिर हमला, भारतीय समेत 13 की मौत; हूतियों की चेतावनी से बढ़ा तनाव

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Riyadh Airport: सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रविवार को एक बार फिर हमला हुआ। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, एयरपोर्ट के यात्री टर्मिनल पर एक प्रोजेक्टाइल आकर गिरा। इससे पहले शनिवार को इसी टर्मिनल को निशाना बनाकर मिसाइल हमला किया गया था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, शनिवार के हमले में 12 लोगों की मौत हुई थी और करीब 300 लोग घायल हुए थे। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई गई थी।

रविवार को सामने आई जानकारी के मुताबिक, शनिवार के हमले में घायल एक भारतीय नागरिक की भी मौत हो गई। इसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। ताजा हमले में भी कई लोगों के घायल होने की खबर है। दोनों हमलों की जिम्मेदारी यमन के हूती विद्रोहियों ने ली है।

लगातार हो रहे हमलों के कारण सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था और खाड़ी क्षेत्र में तनाव को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। शनिवार की घटना के बाद एयरपोर्ट पर उड़ानें रोक दी गई थीं और रविवार को भी विमान सेवाएं बंद रहीं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने की संभावना पर विचार करने की बात कही है।

Riyadh Airport Attack: ट्रंप सऊदी क्राउन प्रिंस से करेंगे बातचीत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा था कि वह सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत करेंगे। रियाद एयरपोर्ट पर लगातार हो रहे हमलों के बीच इस बातचीत को क्षेत्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

खबरों के मुताबिक, सऊदी अरब ने मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने वाली रक्षा प्रणालियों को मजबूत करने के लिए फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से मदद मांगी है। लगातार हमलों के कारण सऊदी अरब के मिसाइल रक्षा संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में दूसरे देशों से तकनीकी और सैन्य सहयोग हासिल करना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।

अमेरिका यदि हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान में सीधे शामिल होता है, तो संघर्ष का दायरा और बढ़ सकता है। इसका असर केवल सऊदी अरब और यमन तक सीमित रहने के बजाय पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ सकता है। लाल सागर में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित होने की आशंका है।

Riyadh Airport Attack: दम्माम एयरपोर्ट और तेल ठिकानों को निशाना बनाने का दावा

हूती विद्रोहियों ने रविवार को दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के दम्माम शहर में स्थित किंग फहद एयरपोर्ट और देश के पूर्वी हिस्से में तेल एवं गैस से जुड़े ठिकानों पर भी हमले किए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

हूती विद्रोहियों ने एयरलाइंस, एयरपोर्ट कर्मचारियों और यात्रियों को सऊदी अरब के एयरपोर्ट तथा उसके हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने से बचने की चेतावनी भी दी है। संगठन ने दावा किया कि मक्का और मदीना के एयरपोर्ट को उसके हमलों से अलग रखा जाएगा।

इन धमकियों के बीच विमान सेवाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्टों के अनुसार, हमलों के खतरे को देखते हुए कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने कुछ समय के लिए अपनी उड़ानें रोक दी हैं। यदि हवाई क्षेत्र में खतरा लंबे समय तक बना रहता है, तो यात्रियों को उड़ानों में देरी, रद्द होने और वैकल्पिक मार्गों से यात्रा करने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

Riyadh Airport Attack: लाल सागर में जहाजों की आवाजाही पर मंडराया खतरा

सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में स्थित बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यहां से बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाज गुजरते हैं, जिनके जरिए तेल और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति होती है।

यदि हूती विद्रोही इस समुद्री मार्ग पर हमले बढ़ाते हैं या जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। जहाजों को वैकल्पिक रास्तों से भेजने की स्थिति में परिवहन का समय और लागत दोनों बढ़ सकते हैं।

इसका असर तेल की कीमतों के साथ-साथ अन्य वस्तुओं के अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर भी पड़ सकता है। हालांकि, कीमतों में वास्तविक बढ़ोतरी संघर्ष की अवधि, आपूर्ति पर पड़ने वाले असर और वैश्विक बाजार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।

सऊदी अरब पहले से ही क्षेत्रीय संघर्षों के कारण सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में एयरपोर्ट और तेल-गैस प्रतिष्ठानों पर हमलों के दावे उसके आर्थिक हितों के लिए अतिरिक्त चिंता पैदा करते हैं।

Riyadh Airport Attack: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन के दौरान बढ़ी चिंता

रियाद में रविवार को एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन आयोजित हो रहा था। आने वाले दिनों में यहां निवेश से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। सऊदी अरब लंबे समय से दुनिया भर के निवेशकों, कारोबारियों और पर्यटकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।

ऐसे समय में एयरपोर्ट पर लगातार हमले होने से सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। यदि विमान सेवाएं बाधित रहती हैं या हवाई यात्रा को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तो विदेशी प्रतिनिधियों, निवेशकों और पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने कहा कि कोई भी सऊदी अरब को कमजोर नहीं कर सकता। उन्होंने जोर दिया कि उनका देश मुश्किल परिस्थितियों के बाद भी मजबूती से खड़ा होने की क्षमता रखता है।

मंत्री ने यह भी बताया कि तेल की आपूर्ति जारी रखने के लिए नई पाइपलाइन पर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, पिछले महीने एक पाइपलाइन पर हमले के बाद उसे कई दिनों तक बंद रखना पड़ा था। ऐसे में वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित करना ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

Riyadh Airport Attack: यमन में भी हवाई हमले में बच्चे की मौत का दावा

एक तरफ सऊदी अरब में हमलों को लेकर तनाव बढ़ रहा है, वहीं यमन से भी हवाई हमले में नागरिकों के मारे जाने की खबर सामने आई है। हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले यमन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया कि रविवार को राजधानी सना में एक घर पर हुए संदिग्ध सऊदी हवाई हमले में एक बच्चे की मौत हो गई और छह लोग घायल हुए।

मंत्रालय के अनुसार, पिछले पांच सप्ताह के दौरान सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हमलों में यमन में 91 लोगों की मौत हुई है। इनमें महिलाओं और बच्चों की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत बताई गई है। हालांकि, इन आंकड़ों और हमले से जुड़े दावों पर सऊदी अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

यमन में जारी संघर्ष के कारण आम नागरिकों की सुरक्षा लगातार एक गंभीर मुद्दा बनी हुई है। दोनों पक्षों की सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों के बीच नागरिक क्षेत्रों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि और घटनाओं की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है।

Riyadh Airport Attack: वर्ष 2015 से जारी है सऊदी अरब और हूतियों का संघर्ष

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष की जड़ें वर्ष 2015 तक जाती हैं। उस समय सऊदी अरब ने यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक लड़ाई जारी रही।

वर्ष 2022 में संघर्षविराम के बाद कुछ समय के लिए हिंसा में कमी आई थी और शांति की उम्मीद जगी थी। हालांकि, बाद के वर्षों में क्षेत्रीय तनाव और विभिन्न सैन्य घटनाओं के कारण स्थिति फिर जटिल होती गई।

अब रियाद एयरपोर्ट पर लगातार हमलों और सऊदी अरब के दूसरे ठिकानों को निशाना बनाने के दावों ने संघर्ष के फिर तेज होने की आशंका बढ़ा दी है। यदि जवाबी सैन्य कार्रवाई बढ़ती है, तो इसका असर यमन के साथ-साथ आसपास के देशों और समुद्री व्यापार मार्गों पर भी पड़ सकता है।

Riyadh Airport Attack: मृतकों में सऊदी, बांग्लादेशी और अन्य देशों के नागरिक शामिल

सऊदी अधिकारियों के अनुसार, शनिवार के हमले में मारे गए 12 लोगों में चार सऊदी नागरिक और दो बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे। इसके अलावा अमेरिका, मिस्र, फिलिस्तीन, जॉर्डन, सीरिया और सूडान के एक-एक नागरिक की मौत हुई थी। बाद में घायल भारतीय नागरिक की मौत की खबर आने के बाद मृतकों की संख्या 13 हो गई।

मृतकों में मिस्र की फ्लाइट अटेंडेंट अज़्ज़ा रमज़ी भी शामिल थीं। वह सऊदी एयरलाइन फ्लाइनास में काम करती थीं। इस घटना में सीरिया की बुथैना अहमद ओवैदा की भी मौत हुई, जो चार बच्चों की मां थीं और पिछले पांच वर्षों से सऊदी अरब में रह रही थीं।

हमले में अलग-अलग देशों के नागरिकों की मौत होने से यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गई है। एयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक स्थान पर हमला होने से यात्रियों, एयरलाइन कर्मचारियों और अन्य लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

भारतीय नागरिक की मौत की खबर के बाद विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है। हालांकि, मृतकों और घायलों की अंतिम संख्या तथा उनकी राष्ट्रीयता से संबंधित जानकारी आधिकारिक अपडेट के साथ बदल सकती है।

Riyadh Airport Attack: हूतियों के हमलों से सैन्य संघर्ष बढ़ने की आशंका

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के यमन मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी ने कहा कि सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल ठिकानों पर हमले करने की रणनीति हूती विद्रोहियों के लिए उलटी पड़ सकती है। उनके मुताबिक, इस तरह के हमलों से सऊदी अरब के पीछे हटने के बजाय हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और तेज करने की संभावना बन सकती है।

लगातार हमलों से दोनों पक्षों के बीच जवाबी कार्रवाई का चक्र तेज होने का खतरा है। यदि सऊदी अरब अपने सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए दूसरे देशों से सैन्य मदद लेता है और अमेरिका भी अभियान में शामिल होता है, तो संघर्ष और व्यापक हो सकता है।

इसका असर नागरिकों की सुरक्षा, हवाई यात्रा, तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर पड़ने की आशंका है। फिलहाल रियाद एयरपोर्ट पर हुए ताजा हमले, भारतीय नागरिक की मौत और हूतियों की ओर से दूसरे ठिकानों को निशाना बनाने के दावों के बीच क्षेत्रीय हालात पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

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