BY
Yoganand Shrivastava
स्वदेशी हथियारों की बढ़ती ताकत, आयात से डिजाइन तक का सफर
Republic Day : मिसाइल, ड्रोन और एआई हथियारों में भारत कितना आत्मनिर्भर हुआ? भारत अब केवल हथियार आयात करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि स्वदेशी तकनीक पर आधारित रक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। हेलिकॉप्टर, लड़ाकू विमान, तोपखाने और रॉकेट सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भारत ने अपनी निर्भरता काफी हद तक कम की है। विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती परियोजनाओं में समय अधिक लगा, लेकिन अनुभव बढ़ने के साथ नई पीढ़ी के हथियार कम समय में विकसित हो रहे हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि देश की रक्षा तकनीक एक सकारात्मक और मजबूत दिशा में आगे बढ़ रही है।

हाइपरसोनिक मिसाइल, ड्रोन और एआई: भविष्य की युद्ध क्षमता
Republic Day हाइपरसोनिक मिसाइलें, जो ध्वनि की गति से कई गुना तेज़ होती हैं, आने वाले समय में युद्ध की परिभाषा बदलने वाली हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल दुनिया में ऐसी मिसाइलों को पूरी तरह रोकने वाला कोई प्रमाणित सिस्टम मौजूद नहीं है। वहीं ड्रोन, स्वार्म टेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स का इस्तेमाल सीमित दायरे में शुरू हो चुका है। एआई आधारित सिस्टम सैनिकों की सहायता कर रहे हैं, हालांकि वे अभी मानव सैनिकों का पूर्ण विकल्प नहीं बन पाए हैं।

पूर्ण आत्मनिर्भरता की राह: चुनौतियां और संभावनाएं
Republic Day रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारत ने ब्रह्मोस, पिनाका, एटीएजीएस, एलसीए, एलसीएच जैसे हथियारों के जरिए वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है, लेकिन पूर्ण आत्मनिर्भरता के लिए अभी लंबा सफर तय करना होगा। इंजन तकनीक, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक्स, परीक्षण अवसंरचना और उन्नत अनुसंधान में निवेश बढ़ाना आवश्यक है। जिस दिन भारत अपना संपूर्ण लड़ाकू विमान, टैंक और मानव रहित फाइटर सिस्टम खुद विकसित कर लेगा, वही असली आत्मनिर्भरता की पहचान होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के इनोवेटर्स को केवल असेंबलर नहीं, बल्कि तकनीक के सृजनकर्ता बनना होगा, तभी देश वैश्विक रक्षा शक्ति के रूप में स्थायी रूप से स्थापित हो सकेगा।
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