रिपोर्ट- दिनेश गुप्ता
Ram Van Gaman Path: अंबिकापुर, छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर रामगढ़ पर्वत एक बार फिर सुर्खियों में है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोल माइंस की ब्लास्टिंग से इस प्राचीन पर्वत पर मंडराते खतरे को लेकर गहरी चिंता जताई है। कहा जा रहा है कि सरगुजा का यह गौरवशाली पहाड़, जहां सीता माता की स्मृतियां बसी हैं और राम वन गमन पथ गुजरता है, अब खनन की धमक से दरकने की कगार पर है। रामगढ़ पर्वत सरगुजा जिले में स्थित है, जहां सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं हैं। ये गुफाएं भारत की सबसे प्राचीन नाट्यशाला और चित्रकला की विरासत मानी जाती हैं, जिनकी उम्र हजारों साल पुरानी है।

Ram Van Gaman Path: मान्यता है कि भगवान राम ने वनवास के दौरान यहां समय बिताया था। कांग्रेस सरकार के समय यहां राम वन गमन पर्यटन सर्किट विकसित किया गया था। लेकिन अब हसदेव अरण्य क्षेत्र में केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक के लिए दी गई मंजूरी से विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय ग्रामीण और विशेषज्ञों का कहना है कि कोल माइंस में हो रही ब्लास्टिंग से पर्वत में कंपन हो रहा है, दरारें आ रही हैं और लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ गया है।पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने इस पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा रामगढ़ पर्वत कोल ब्लास्टिंग से दरक रहा है। हमारी 5000 साल पुरानी विरासत खतरे में है।

सरगुजा का गौरवशाली रामगढ़ पहाड़, जहां सीता माता की स्मृतियां बसी हैं, अब खनन की धमक से दरकने की कगार पर है। कांग्रेस सरकार में बना राम वन गमन पर्यटन पथ, अब उसी धरोहर को मिटाने की आशंका है। अरावली की तरह अब सरगुजा की पहचान भी खतरे में है।
Ram Van Gaman Path: रामगढ़ पर्वत, छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का स्थान है, जिसे भगवान राम के वनवास से जोड़ा जाता है, जहाँ सीता बेंगरा और जोगीमारा गुफाएँ हैं, और महाकवि कालिदास ने मेघदूत की रचना यहीं की थी; यह कोयला खदानों के कारण खतरे में है, जिससे संरक्षण को लेकर चिंताएँ हैं, जबकि एक अन्य रामगढ़ उत्तराखंड में एक हिल स्टेशन है.
Ram Van Gaman Path: छत्तीसगढ़ का रामगढ़ (रामगिरि)
स्थान: सरगुजा जिले का उदयपुर, अम्बिकापुर-बिलासपुर मार्ग पर स्थित है. मान्यता है कि यह भगवान राम के वनवास मार्ग का हिस्सा था; यहाँ राम मंदिर, जानकी तालाब और बजरंगबली की प्रतिमा है. ऐतिहासिक महत्व ये है कि इसे ‘रामगिरि’ भी कहते हैं; विश्व की सबसे प्राचीन नाट्यशाला (सीता बेंगरा गुफा) और जोगी मारा गुफा यहीं हैं; महाकवि कालिदास ने यहीं मेघदूत की रचना की थी। संरक्षण की चिंता, कोयला खदानों की ब्लास्टिंग से भूस्खलन और दरारों का खतरा है, जिससे स्थानीय लोग और राजनीतिक दल इसके संरक्षण की मांग कर रहे हैं।





