ढोल-नगाड़ों से सरकार को जगाने की अनोखी पहल
रायगढ़/धरमजयगढ़। पंचायत सचिव संघ की हड़ताल लगातार जारी है और अब उन्होंने अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए अनोखा तरीका अपनाया है। धरमजयगढ़ में चल रहे प्रदर्शन के दौरान सचिवों ने ढोल-नगाड़े बजाकर सरकार को जगाने की कोशिश की। उनका कहना है कि वे वर्षों से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है।
शासकीयकरण की मांग
पंचायत सचिव संघ की मुख्य मांग है कि उनका शासकीयकरण किया जाए, जिससे उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा मिल सके और उनका भविष्य सुरक्षित हो। सचिवों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक निष्ठा से पंचायतों में कार्य किया है, लेकिन अब सरकार उन्हें नजरअंदाज कर रही है।
ग्राम रोजगार सहायकों को सौंपा गया प्रभार
सरकार द्वारा पंचायत सचिवों के कार्यों का प्रभार अस्थायी रूप से ग्राम रोजगार सहायकों को सौंप दिया गया है ताकि पंचायतों का कार्य प्रभावित न हो। लेकिन सचिवों का कहना है कि यह निर्णय उनके आत्मसम्मान और हौसले को तोड़ने जैसा है।
मोदी की गारंटी बनी मुद्दा
सचिव संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी का हवाला देते हुए कहा कि चुनावी मंचों से शासकीयकरण का वादा किया गया था, लेकिन अब सरकार मुकर रही है। सचिवों ने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार सहायकों से सचिवों का कार्य करवा कर सचिवों की भूमिका को कमज़ोर कर रही है।
सांस्कृतिक माध्यमों से विरोध
प्रदर्शनकारियों ने सिर्फ ढोल-नगाड़ों से ही नहीं, बल्कि कविताओं के माध्यम से भी सरकार को जगाने की कोशिश की। यह विरोध अब सिर्फ नारेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले रहा है।
प्रशासन की चुप्पी
अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन या वार्ता की पहल नहीं की गई है। सचिव संघ ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन को और उग्र रूप देंगे।





