प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 फरवरी को राज्यसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर अपना जवाब दिया। अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए उन्होंने राष्ट्रपति के भाषण को प्रेरणादायक और उत्साहवर्धक बताया, जिसमें ‘विकसित भारत’ का संकल्प व्यक्त किया गया था।

कांग्रेस पर प्रधानमंत्री का हमला:
अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा, “कांग्रेस से ‘सबका साथ, सबका विकास’ की उम्मीद करना बड़ी गलती होगी। कांग्रेस के लिए यह संभव नहीं है। कांग्रेस न तो इसे समझ पाती है, न ही इसकी कार्ययोजना में ऐसा कोई स्थान है। क्योंकि कांग्रेस, एक बड़ा संगठन होने के बावजूद, केवल एक परिवार के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गया है।”
कांग्रेस के मॉडल पर आलोचना:
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “कांग्रेस ने भारतीय राजनीति में जो मॉडल तैयार किया, उसमें झूठ, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टिकरण का मिश्रण था। ऐसे माहौल में ‘सबका विकास’ संभव नहीं हो सकता।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मॉडल ‘फैमिली फर्स्ट’ पर आधारित है, और इसलिए उनकी नीतियां और कार्य केवल एक परिवार को फायदा पहुंचाने पर ही केंद्रित रही हैं।
इमरजेंसी के दौर की यादें:
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में 1975 के आपातकाल (इमरजेंसी) के दौर का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “यह देश उस समय को नहीं भूल सकता, जब संविधान को कुचला गया था और सत्ता की भूख के लिए उसकी आत्मा को रौंद दिया गया था।” इस दौरान उन्होंने कवि नीरज की एक कविता का उल्लेख किया, जो उस काल के अंधकार को उजागर करती है: “है बहुत अंधयारा, अब सूरज निकलना चाहिए, जिस तरह से भी हो ये मौसम बदलना चाहिए। फिर दीप जलेगा, मेरे देश उदास न हो, फिर दीप जलेगा।”
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि आपातकाल के समय देव आनंद जैसे प्रसिद्ध अभिनेता को सार्वजनिक रूप से आपातकाल का समर्थन करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने इससे इंकार कर दिया। इसके बाद, दूरदर्शन पर देव आनंद की फिल्मों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसी तरह, किशोर कुमार ने कांग्रेस के लिए गाने से मना कर दिया था, जिसके कारण उनके गानों को आकाशवाणी से प्रतिबंधित कर दिया गया था। आपातकाल के दौरान, जॉर्ज फर्नांडिस समेत कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार किया गया और उन्हें हथकड़ी और ज़ंजीरों से बांधकर रखा गया।
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