BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में गहराते युद्ध के संकट और वैश्विक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी शुक्रवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करेंगे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य युद्ध के संभावित प्रभावों से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल बिठाना है।

New Delhi ‘टीम इंडिया’ की भावना से चुनौतियों का सामना
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में राज्यसभा में संबोधन के दौरान युद्ध के लंबे समय तक चलने वाले प्रभावों के प्रति आगाह किया था। कल की बैठक में वे कोविड-19 महामारी के दौरान दिखाए गए ‘टीम इंडिया’ के मॉडल को दोहराने पर जोर देंगे। सूत्रों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर बढ़ते तनाव और ऊर्जा प्रवाह में आने वाली बाधाओं को देखते हुए देश की एकता और तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।

New Delhi ऊर्जा सुरक्षा: 60 दिनों का तेल भंडार सुरक्षित
देश में ईंधन की कमी की अफवाहों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत के पास अगले 2 महीने (60 दिन) के लिए कच्चे तेल और ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने पहले ही आयात की अग्रिम व्यवस्था कर ली है, जिससे आपूर्ति बाधित होने का कोई खतरा नहीं है। सरकार ने जनता से अपील की है कि वे घबराकर खरीदारी (Panic Buying) न करें।

New Delhi सर्वदलीय बैठक के बाद अब मुख्यमंत्रियों से संवाद
इससे पहले बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी, जिसमें सभी दलों को मौजूदा वैश्विक स्थिति से अवगत कराया गया था। अब प्रधानमंत्री सीधे राज्यों के मुख्यमंत्रियों से संवाद कर उन्हें भारत की विकास गति को बनाए रखने और स्थानीय स्तर पर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।





