रायगढ़। रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र के ग्राम लमदरहा के 25 वर्षीय युवक परमानंद राठिया ने अपने संकल्प और परिश्रम से एक अद्भुत मिसाल कायम की है। परमानंद ने साइकिल से 600 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर प्रयागराज पहुंचने में सफलता प्राप्त की है। उनका यह प्रयास न केवल शारीरिक मजबूती का प्रतीक है, बल्कि संकल्प और आस्था की शक्ति को भी दर्शाता है।
17 फरवरी को परमानंद ने अपनी यात्रा की शुरुआत साइकिल से की थी। उन्होंने साइकिल पर सवार होकर प्रयागराज के लिए प्रस्थान किया और आज, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर, वे संगम में आस्था की डुबकी लगाने के लिए तैयार हैं। उनका यह यात्रा महज एक यात्रा नहीं, बल्कि एक संकल्प का प्रतीक है, जिसमें उन्होंने अपनी आस्था और श्रद्धा को सर्वोपरि रखते हुए यह कठिन यात्रा पूरी की है।
आस्था और संकल्प का अनोखा उदाहरण
परमानंद का कहना है, “महाशिवरात्रि के दिन संगम में आस्था की डुबकी लगाना मेरे लिए जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। मैं अपनी यात्रा को एक धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव के रूप में देखता हूं।”
यात्रा के दौरान उन्होंने तमाम कठिनाइयों का सामना किया, फिर भी उनका संकल्प अडिग रहा। महाशिवरात्रि पर संगम में डुबकी लगाने के बाद, परमानंद अपने गांव लमदरहा लौटने के लिए फिर से साइकिल से ही यात्रा करेंगे।

संकल्प, परिश्रम और आस्था का संगम
परमानंद राठिया का यह कदम न केवल उनकी व्यक्तिगत श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। उनकी यात्रा और संकल्प ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर मन में दृढ़ संकल्प हो, तो कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं होता।
इस प्रेरणादायक यात्रा के साथ परमानंद ने यह भी साबित किया है कि आस्था और परिश्रम मिलकर किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं। वे महाशिवरात्रि के दिन संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे, और इसके बाद अपने गांव लौटकर इस अद्भुत यात्रा के अनुभवों को साझा करेंगे।





