फेक न्यूज और सोशल मीडिया के भ्रामक कंटेंट पर समिति ने रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर को सौंपी
आर पी श्रीवास्तव, विजय नंदन
आज के इस डिजिटल युग में, जहाँ मीम्स, रील्स और AI-जनरेटेड वीडियो मनोरंजन का एक बड़ा हिस्सा बन चुके हैं, वहीं ये भ्रामक और खतरनाक भी साबित हो रहे हैं। हमने देखा है कि कैसे सोशल मीडिया ने कई देशों में सरकारों को हिला दिया, फिर चाहे वह श्रीलंका हो, बांग्लादेश हो या हाल ही में नेपाल। इन्हीं चिंताओं को देखते हुए, संसद की एक स्थायी समिति ने फेक न्यूज को लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया है और इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की सिफारिशें की हैं। ये सिफारिशें न केवल संपादकों और मीडिया प्लेटफार्मों की जवाबदेही तय करने की बात करती हैं, बल्कि AI-जनरेटेड कंटेंट पर लेबलिंग अनिवार्य करने और फर्जी खबरों के लिए जुर्माना बढ़ाने का भी सुझाव देती हैं। लेकिन क्या यह मीडिया की अघोषित सेंसरशिप की तरफ एक कदम है, जैसा कि विपक्ष आरोप लगा रहा है? या फिर यह हमारे डिजिटल स्पेस को साफ करने के लिए एक जरूरी कदम है?

दुनियाभर में जिस तेज गति से डिजिटल मीडिया अपना विस्तार कर रहा है, उसी तेज गति से इसके दुरुपयोग भी सामने आ रहे हैं. इसका प्रभाव इतना है कि किसी भी देश की सरकार का तख्तापलट तक कर दिया जाता है. श्रीलंका इसका उदारण है, बांग्लादेश, इंडोनेशिया इसका उदारहण है और अब gen z के रूप में नेपाल ने जो भुगता वो सबके सामने है। फ्रांस में block Everythings प्रोटेस्ट ने भी सरकार को हिला दिया। कुल मिलाकर सरकारों के खिलाफ सोशल मीडिया बेंचमार्क बन गया है। इन्हीं सब चिंताओं को देखते हुए फेक न्यूज को लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताते हुए संसद की स्थायी समिति ने सख्त कदम उठाने की सिफारिश की है। समिति ने कहा है कि प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में फैक्ट-चेकिंग सिस्टम और आंतरिक ‘लोकपाल’ अनिवार्य हो। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली समिति ने यह रिपोर्ट सर्वसम्मति से मंजूर की है। रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला को सौंप दी गई है। इसे संसद के अगले सत्र में पेश किया जा सकता है। समिति की सिफारिशों में कौन-कौन से बिंदु शामिल हैं..मोटा मोटी एक नजर डाल लेते हैं।
संसदीय समिति की सिफारिशें !
- संपादकों और प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी तय हो।
- सामग्री प्रमुखों को जिम्मेदार ठहराया जाए।
- संस्थागत विफलताओं के लिए प्रकाशकों को जवाबदेह ठहराया जाए।
- फर्जी खबरों के प्रकाशन-प्रसारण पर नियमों में संशोधन पर बल दिया जाए।
- मौजूदा नियमों और दंडात्मक प्रावधानों में संशोधन पर बल दिया जाए।
- समिति ने गलत सूचनाओं के लिए सख्त उपायों की सिफारिश की है।
- फेक न्यूज से बाजार और मीडिया की साख को भी खतरा है।
- फेक न्यूज की परिभाषा स्पष्ट हो, जुर्माना बढ़े।
- महिला-बच्चों पर भ्रामक सामग्री बनाने में AI का दुरूपयोग रोका जाए।
- एआई से बने कंटेंट पर लेबलिंग अनिवार्य करने की सिफारिश की
- इसकी लाइसेंसिंग व्यवस्था पर विचार करने को भी कहा है।
- सीमा पार की फेक न्यूज से निपटने के लिए अंतर-मंत्रालयी टास्क फोर्स बने।
- मीडिया साक्षरता स्कूली शिक्षा में शामिल हो।
- IT एक्ट की धारा 79 के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को छूट पर भी चिंता जताई।

मीडिया संस्थानों में जब संसदीय समिति की सिफारिशों की चर्चा जोरों पर है, ऐसे समय में बिहार कांग्रेस द्वारा सोशल मीडिया पर की गई एक AI जेनेरेटेड मीम वीडियो पोस्ट ने सियासी पारा फिर चढ़ा दिया है। ये मीम पीएम मोदी और उनकी दिवंगत मां को लेकर बनाया गया है. इस मीम के वायरल होने के बाद पक्ष-विपक्ष में वार पलटवार शुरू हो गया है।
#WATCH | Patna, Bihar | On an AI-generated video posted by the Bihar Congress showing two characters purportedly resembling PM Modi and his late mother, BJP MP Ravi Shankar Prasad says, "This is a very shameful thing. Is this the level of the Congress party? They make memes of… pic.twitter.com/2cDgQx1wcY
— ANI (@ANI) September 12, 2025
रवि शंकर प्रसाद, सांसद, बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार किया और इसे शर्मनाक बताया।
#WATCH | Delhi | On an AI-generated video posted by Bihar Congress showing two characters purportedly resembling PM Modi and his late mother, Congress leader Pawan Khera says, "Where is the disrespect shown to his late mother? Show me one word, one gesture, anywhere where you see… pic.twitter.com/z1igU5dohG
— ANI (@ANI) September 12, 2025
पवन खेड़ा, नेता, कांग्रेस ने कहा – “उनकी दिवंगत मां के प्रति अनादर कहां है? मुझे एक शब्द, एक इशारा, कहीं भी दिखाइए जहां आप अनादर देखते हैं। माता-पिता का कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को शिक्षित करें। वह केवल अपने बच्चे को शिक्षित कर रही हैं और अगर बच्चे को लगता है कि यह उनके प्रति अनादर है, तो यह उनका सिरदर्द है, मेरा नहीं, आपका नहीं।
डिजिटल दुनिया की चकाचौंध में, जहाँ मीम्स, रील्स, GIF और AI-जनरेटेड वीडियो मनोरंजन का जरिया बन गए हैं, वहीं ये एक दोहरा चेहरा भी रखते हैं. पलक झपकते ही किसी की भी छवि को चमकाने या बिगाड़ने की ताकत इनमें होती है. एक गलत वीडियो या भ्रामक इमेज पोस्ट जंगल की आग की तरह फैल सकती है और किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, करियर और मानसिक शांति को तहस-नहस कर सकती है. हाल ही में केंद्र सरकार ऑन लाइन गेमिंग एक्ट लाई है. अब संसदीय समिति की सिफारिशों पर सरकार का क्या रूख होगा ये देखने वाली बात होगी, रही बात विपक्ष के मीडिया पर अघोषित सेंसरशिप के आरोपों की तो ये तय करने का हक मीडिया संस्थानों पर छोड़ देना चाहिए. लेकिन सोशल मीडिया पर बैन के परिणामों को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है.. नेपाल इसका सबसे ताजा उदाहरण है.





