Vijay Nandan (वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल एडिटर)
Parliament Budget Session 2026 ;नई दिल्ली, संसद के बजट सत्र का आज पांचवां दिन रहा। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान एक बार फिर लोकसभा में विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा किया, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई। हंगामे के चलते लोकसभा को कुछ समय के लिए स्थगित भी करना पड़ा। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने भारत–अमेरिका व्यापार समझौते और अन्य मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। बढ़ते शोर-शराबे को देखते हुए अध्यक्ष ने पहले सदन को 12 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

Parliament Budget Session 2026 : राहुल गांधी के बयान के बाद बढ़ा विवाद
गौरतलब है कि सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सदन में चीन से जुड़े मुद्दे उठाए थे, जिस पर सरकार की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। उस दौरान गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया था। हालात बिगड़ने पर सोमवार को भी कार्यवाही रोकनी पड़ी थी।

Parliament Budget Session 2026 : राज्यसभा में नड्डा का विपक्ष पर हमला
इधर, राज्यसभा में विपक्ष द्वारा भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सवाल उठाए जाने पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस और INDIA गठबंधन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर पूरी तरह से स्पष्ट है और स्वतः संज्ञान लेते हुए विस्तृत बयान देने को तैयार है।
जेपी नड्डा ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए बयान और उसके बाद हुई बातचीत सार्वजनिक है। ऐसे में चर्चा से भागने का आरोप लगाना गलत है। उन्होंने विपक्ष के रवैये को हताशा से प्रेरित बताया।
Parliament Budget Session 2026 : सरकार जवाब के लिए तैयार
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यदि विपक्ष भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर औपचारिक चर्चा की मांग करता है, तो सरकार संसद के दोनों सदनों में इस पर जवाब देने को तैयार है।
Parliament Budget Session 2026 : बार-बार स्थगन से प्रभावित हो रही कार्यवाही
लगातार हो रहे हंगामे के कारण राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा सुचारू रूप से आगे नहीं बढ़ पा रही है। सत्ता पक्ष ने विपक्ष से सदन चलने देने की अपील की है, जबकि विपक्ष अपने मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है।
संपादकीय नजरिया :
संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक बहस और संवाद की अपेक्षा की जाती है। लेकिन हाल के दिनों में संसद में लगातार बना गतिरोध इस मूल भावना पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। बजट सत्र जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर जब देश की आर्थिक दिशा और नीतियों पर चर्चा होनी चाहिए, तब बार-बार कार्यवाही का स्थगन लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है।
विपक्ष का यह दायित्व है कि वह सरकार से सवाल पूछे, जवाब मांगे और जनभावनाओं को सदन में रखे। वहीं सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह संवाद के लिए सदैव तैयार रहे। दुर्भाग्यवश, हंगामा और नारेबाजी अब बहस का स्थान लेती जा रही है, जिससे संसद केवल टकराव का मंच बनकर रह जाती है।
संसद का ठप होना किसी एक दल की हार नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र की क्षति है। अब समय आ गया है कि राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी जाए।





