मुख्य बिंदु:
- 22 अप्रैल को पहलगाम में 25 हिंदुओं की निर्मम हत्या के बाद TRF (The Resistance Front) ने पहले हमले की जिम्मेदारी ली।
- 4 दिन बाद, TRF ने अचानक अपना बयान बदलते हुए कहा— “हमारी वेबसाइट हैक हुई, भारतीय एजेंसियों ने झूठा दावा करवाया!”
- सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान के ISI के दबाव में TRF ने यह बयान जारी किया, क्योंकि भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाक को घेरना शुरू कर दिया है।
TRF के दावे में झोल कहाँ?
- समय का सवाल:
- हमले के तुरंत बाद TRF ने जिम्मेदारी ली, लेकिन 4 दिन बाद अचानक “साइबर अटैक” का बहाना क्यों बनाया?
- अगर वेबसाइट हैक हुई थी, तो TRF को तुरंत खुलासा क्यों नहीं करना चाहिए था?
- पाकिस्तान का रिकॉर्ड:
- TRF, लेटे (Lashkar-e-Taiba) का ही छद्म संगठन है, जिसे पाकिस्तानी ISI समर्थन देता है।
- 2019 के पुलवामा हमले में भी पाकिस्तान ने शुरू में जिम्मेदारी से इनकार किया था, लेकिन बाद में सबूतों के सामने झुकना पड़ा।
- भारत पर झूठे आरोप:
- TRF ने 2000 के छत्तीसिंगपुरा नरसंहार और 2001 के संसद हमले को भी भारत की “साजिश” बताया, जबकि इनमें पाक-आतंकियों का हाथ साबित हो चुका है।
क्या है TRF की रणनीति?
- झूठे झंडे (False Flag) का खेल:
TRF चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत पर “कश्मीरियों को फ्रेम करने” का आरोप लगाए। - पाकिस्तान को बचाना:
पहलगाम हमले के बाद UNSC ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। ऐसे में TRF का यह बयान ISI की मंशा को उजागर करता है।
Swadeh News का सवाल:
“क्या TRF यह समझाना चाहता है कि भारतीय एजेंसियाँ 25 निर्दोष लोगों को मरवाकर खुद पर ही आरोप लगवाएँगी? यह तर्क हास्यास्पद है!”
निष्कर्ष:
TRF का यह बयान दबाव में आकर दिया गया झूठ लगता है। भारत ने पाकिस्तान को कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर घेरा है, इसलिए TRF अब पीछे हट रहा है। अगले कुछ दिनों में और सबूत सामने आ सकते हैं।





