BY: VIJAY NANDAN (Editor Swadesh Digital)
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 23 अप्रैल 2025 को हुआ आतंकी हमला, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई, ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में पर्यटकों को निशाना बनाया गया, जिसकी जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के छद्म संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने ली है। लेकिन अब सूत्रों के हवाले से एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इस हमले के पीछे फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास का दिमाग हो सकता है। दावा किया जा रहा है कि हमास के पैटर्न को फॉलो करते हुए यह हमला अंजाम दिया गया और इसके लिए पीओके में लश्कर और हमास के बीच बैठकों का दौर चला।

पहलगाम के बैसरन घाटी, जिसे ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से जाना जाता है, में मंगलवार दोपहर करीब 2:45 बजे आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में 26 लोग मारे गए, जिनमें दो विदेशी पर्यटक (इजरायल और इटली से) और कई राज्यों के भारतीय पर्यटक शामिल थे। 20 से अधिक लोग घायल हुए। हमलावरों ने कथित तौर पर लोगों की धार्मिक पहचान पूछकर उन्हें निशाना बनाया, जो इजरायल में 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले की याद दिलाता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आतंकियों ने बॉडी कैमरे पहने थे और पूरी घटना को रिकॉर्ड किया।
हमास का कनेक्शन: सूत्रों का दावा
सूत्रों के अनुसार, इस हमले की साजिश पीओके में रची गई, जहां लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हमास के सदस्यों ने कई बैठकों में हिस्सा लिया। 5 फरवरी 2025 को पीओके के रावलकोट में ‘कश्मीर सॉलिडेरिटी एंड अल अक्सा फ्लड’ नामक कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई थी, जिसमें हमास के कमांडरों—डॉ. खालिद कद्दूमी, डॉ. नाजी जहीर और मुफ्ती आजम—के शामिल होने की खबर है। इन बैठकों का मकसद जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों को भारत के खिलाफ भड़काना था।
हमले से ठीक पहले, शनिवार को रावलकोट में एक और बैठक हुई, जिसमें लश्कर के मारे गए आतंकी आकिफ हलीम को श्रद्धांजलि दी गई। सूत्रों का दावा है कि इस बैठक में पहलगाम हमले की अंतिम योजना बनाई गई। हमले का पैटर्न—निहत्थे पर्यटकों को निशाना बनाना, धर्म के आधार पर टारगेटिंग, और घटना को रिकॉर्ड करना—हमास के 7 अक्टूबर 2023 के इजरायल हमले से मिलता-जुलता है, जिसमें 1200 लोग मारे गए थे।
पीओके में आतंकी गठजोड़
खुफिया एजेंसियों ने बताया कि पीओके में 42 आतंकी लॉन्चिंग पैड सक्रिय हैं, जहां 110-130 आतंकी मौजूद हैं। पिछले साल बहावलपुर, पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय में हमास के शीर्ष आतंकियों की मौजूदगी दर्ज की गई थी। इन बैठकों में जैश प्रमुख मसूद अजहर, हिजबुल मुजाहिदीन के सैयद सलाहुद्दीन और अन्य कुख्यात आतंकी शामिल थे। भारतीय खुफिया एजेंसियों को घटनास्थल से मिले उन्नत संचार उपकरणों से पता चला कि हमलावर पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के संपर्क में थे।
भारत की प्रतिक्रिया
पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब का दौरा बीच में छोड़कर दिल्ली लौटते ही सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक बुलाई, जिसमें पांच बड़े फैसले लिए गए। भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया और पाकिस्तान के खिलाफ अन्य कड़े कदम उठाए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की मौजूदगी में तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ 150 मिनट की हाई-लेवल बैठक हुई, जिसमें सैन्य विकल्पों पर चर्चा की गई।
सर्वदलीय बैठक में सभी राजनीतिक दलों ने हमले की निंदा की और सरकार को सख्त कार्रवाई के लिए अधिकृत किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सुरक्षा में चूक पर सवाल उठाए, जबकि बीजेपी सांसद सांबित पात्रा ने एकजुटता का संदेश दिया।
पहलगाम आतंकी हमला न केवल एक क्रूर कृत्य है, बल्कि यह पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों और हमास जैसे वैश्विक आतंकी नेटवर्क के बीच बढ़ते गठजोड़ का संकेत देता है। हमास के पैटर्न और पीओके में रची गई साजिश ने भारत की सुरक्षा चुनौतियों को और जटिल कर दिया है। भारत सरकार का सख्त रुख और सैन्य कार्रवाई के संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आतंकियों और उनके प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराने के लिए निर्णायक कदम उठाए जा सकते हैं। इस हमले ने एक बार फिर कश्मीर की शांति और पर्यटन पर सवाल खड़े किए हैं, जिसका जवाब केवल आतंकवाद के खिलाफ एकजुट और प्रभावी कार्रवाई से दिया जा सकता है।





