OBC Politics : छत्तीसगढ़ की राजनीति में फिर गरमाया OBC मुद्दा,OBC बड़ा वोट बैंक, किसकी पकड़ कितनी मजबूत ?
OBC Politics : रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में भाजपा ओबीसी मोर्चा का संभाग स्तरीय प्रबुद्धजन सम्मान और कार्यकर्ता सम्मेलन… लेकिन मंच पर जुटी भीड़ और नेताओं के भाषण के पीछे सिर्फ संगठन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि बड़ा सियासी संदेश भी दिखाई दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि रहे, केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। रायपुर संभाग के अलग-अलग जिलों से भाजपा ओबीसी मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता पहुंचे। शिक्षा, चिकित्सा, प्रशासन, व्यवसाय, कृषि, सामाजिक सेवा और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान देने वाले प्रबुद्धजनों का सम्मान भी किया गया। लेकिन सवाल ये है कि भाजपा आखिर ओबीसी समाज के बीच इतनी सक्रिय क्यों नजर आ रही है ?इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे लेकिन पहले देखिये ये रिपोर्ट।।।।
OBC Politics : दरअसल, छत्तीसगढ़ की सियासत में आदिवासी वोट बैंक के बाद अब ओबीसी वोट बैंक पर भाजपा का फोकस साफ दिखाई दे रहा है। संगठन से लेकर बूथ स्तर तक ओबीसी समाज के डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, कारोबारी और समाजसेवियों को जोड़ने और सम्मानित करने की कवायद चल रही है। संदेश साफ है सिर्फ चुनावी मंचों से नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व के जरिए ओबीसी समाज के बीच भाजपा की पकड़ और मजबूत की जाए। वहीं ओबीसी सम्मेलन के मंच से उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। उनका आरोप है कि कांग्रेस ने ओबीसी समाज को लंबे समय तक सिर्फ वोट बैंक समझा, जबकि भाजपा सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने समेत ओबीसी समाज के हित में कई कदम उठाए…
OBC Politics : राजनीतिक जानकार इस आयोजन को छत्तीसगढ़ के बदलते सियासी समीकरण से जोड़कर देख रहे हैं। बस्तर की 12 विधानसभा सीटों में भाजपा के पास 8 और कांग्रेस के पास 4 सीटें हैं, जबकि सरगुजा की सभी 14 सीटें भाजपा के कब्जे में हैं। इसके बावजूद आदिवासी इलाकों में जल-जंगल-जमीन, स्थानीय मुद्दों और संभावित नाराजगी को लेकर भाजपा के सामने चुनौती बनी हुई है। यही वजह है कि आदिवासी राजनीति के साथ अब ओबीसी समीकरण को मजबूत करने की कोशिश तेज होती दिख रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव के सड़क हादसे के बाद जब नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं चलीं, तब ओबीसी वर्ग से केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू और वरिष्ठ नेता धरमलाल कौशिक के नाम भी चर्चा में रहे। ऐसे में मुख्यमंत्री आदिवासी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदिवासी और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी आदिवासी वर्ग से होने के बीच ओबीसी नेतृत्व को लेकर भाजपा की सक्रियता का अपना सियासी मतलब है। हालांकि कांग्रेस इसे भाजपा की राजनीतिक रणनीति बता रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय का दावा है कि जनता सरकार से परेशान है और अगर कल चुनाव हो जाएं तो बस्तर और सरगुजा में भी कांग्रेस जीत सकती है।
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