वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर आक्रामक व्यापार नीति का संकेत दिया है। उन्होंने हाल ही में ऐलान किया कि अमेरिका जल्द ही दवाइयों पर भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की तैयारी में है। ट्रम्प का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य विदेशों में दवाएं बना रही कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना और अमेरिकी दवा उद्योग को मजबूती देना है।
भारत पर पड़ सकता है असर
ट्रम्प की इस नीति का सीधा असर भारत पर पड़ सकता है। भारत, अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है और कुल जेनेरिक दवाओं का लगभग 40% हिस्सा भारत से अमेरिका भेजा जाता है। अगर इन दवाओं पर टैरिफ लगाया गया, तो भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक कीमतों पर असर पड़ेगा और उनके मुनाफे में गिरावट आ सकती है।
ट्रम्प का उद्देश्य
ट्रम्प ने कहा, “हम दवा कंपनियों को अमेरिका में वापस लाएंगे। अब हम विदेशों पर निर्भर नहीं रह सकते। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता है।”
ट्रम्प पहले भी मेड इन अमेरिका अभियान के तहत कई उत्पादों पर टैरिफ लगा चुके हैं, जिसमें स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य चीज़ें शामिल हैं। अब दवाओं को भी इस नीति में शामिल करने का संकेत उन्होंने साफ दे दिया है।
क्या हो सकता है असर?
भारतीय फार्मा कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा, जिन्हें अब अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए टैरिफ की चुनौती से जूझना पड़ सकता है।
अमेरिकी उपभोक्ताओं को महंगी दवाएं खरीदनी पड़ सकती हैं, क्योंकि अमेरिका में दवा उत्पादन की लागत अपेक्षाकृत अधिक है।
ग्लोबल फार्मा सप्लाई चेन में असंतुलन पैदा हो सकता है, जिससे दवा की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ेगा।





