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न्यूयॉर्क का बड़ा फैसला: बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर नई सख्ती

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न्यूयॉर्क का बड़ा फैसला: बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर नई सख्ती

BY: MOHIT JAIN

न्यूयॉर्क ने बच्चों की मानसिक सेहत और डिजिटल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया एल्गोरिदम पर कड़ा कदम उठाया है। अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स के कार्यालय ने ऐसे नियमों का प्रस्ताव रखा है, जिनका सीधा असर इंस्टाग्राम, टिकटॉक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पड़ेगा।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में बच्चों और किशोरों की सोशल मीडिया लत और उसके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ रही है।


SAFE एक्ट: बच्चों के लिए एल्गोरिदमिक फीड पर रोक

पिछले साल पारित SAFE (Stop Addictive Feeds Exploitation) Act के तहत अब सोशल मीडिया कंपनियां 18 साल से कम उम्र के यूजर्स को एल्गोरिदम-आधारित पर्सनलाइज्ड फीड नहीं दिखा सकेंगी, जब तक कि उनके माता-पिता इसकी अनुमति न दें।

  • बिना अनुमति के, बच्चों को केवल उन्हीं अकाउंट्स के पोस्ट दिखेंगे जिन्हें वे फॉलो करते हैं।
  • आधी रात से सुबह 6 बजे तक कंपनियां नाबालिग यूजर्स को कोई नोटिफिकेशन नहीं भेज पाएंगी।

उम्र और अभिभावक की सहमति की अनिवार्यता

नए नियमों के तहत कंपनियों को बच्चों की उम्र सत्यापित करनी होगी। इसके लिए कई तरीके सुझाए गए हैं, जैसे –

  • ईमेल या फोन नंबर की जांच
  • यूजर द्वारा अपलोड की गई पहचान संबंधी फोटो
  • सुरक्षित और डेटा प्रोटेक्शन फ्रेंडली वेरिफिकेशन सिस्टम

यदि बच्चा एल्गोरिदम फीड चाहता है, तो इसके लिए कंपनियों को माता-पिता से अनुमति लेनी होगी।

क्यों उठाया गया यह कदम?

विशेषज्ञों का कहना है कि एल्गोरिदमिक फीड्स बच्चों को घंटों तक प्लेटफॉर्म पर रोके रखते हैं, जिससे चिंता, अवसाद और लत जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने कहा,

“सोशल मीडिया के नशे जैसे फीचर्स ने बच्चों और किशोरों को मानसिक स्वास्थ्य संकट में डाल दिया है। इन नियमों से उन्हें सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है।”

कब से लागू होंगे नए नियम?

  • प्रस्तावित नियमों पर 60 दिन की सार्वजनिक टिप्पणी अवधि रखी गई है।
  • अंतिम मंजूरी के बाद, सोशल मीडिया कंपनियों को इन्हें लागू करने के लिए 180 दिन का समय मिलेगा।

हालांकि, अमेरिका के कई राज्यों में उम्र सत्यापन कानूनों को लेकर कानूनी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। फिर भी, न्यूयॉर्क का यह कदम बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए एक मिसाल बन सकता है।

न्यूयॉर्क का यह फैसला बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और ऑनलाइन सुरक्षा के लिहाज से ऐतिहासिक माना जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य राज्य और देश भी इस दिशा में कब कदम बढ़ाते हैं।

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