BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच, भारत सरकार ने देशभर में ESMA (Essential Services Maintenance Act) लागू करने का कड़ा फैसला लिया है। यह कदम वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में अस्थिरता के कारण घरेलू बाजार में संभावित संकट को रोकने के लिए उठाया गया है। सरकार का मुख्य लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और जनता को निर्बाध आपूर्ति प्रदान करना है।
LPG आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार के कड़े निर्देश
New Delhi सरकार ने पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे एलपीजी के उत्पादन को अधिकतम स्तर पर ले जाएं। जमाखोरी और घबराहट में की जाने वाली खरीदारी (Panic Buying) को रोकने के लिए एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि देश में गैस का पर्याप्त भंडार है, लेकिन मांग में अचानक आई 15-20% की बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए यह समय-सीमा बढ़ानी जरूरी थी।
क्या है ESMA और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
New Delhi ESMA यानी ‘आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम’ 1968 में बनाया गया एक कानून है, जो अनिवार्य सेवाओं (जैसे बिजली, पानी, परिवहन और स्वास्थ्य) में बाधा डालने वाली हड़तालों या काम रोकने की गतिविधियों पर रोक लगाता है। वर्तमान परिस्थितियों में, इसे अधिकतम 6 महीने के लिए लागू किया गया है ताकि ईंधन के वितरण और उत्पादन में कोई मानवीय अवरोध न आए। इसके तहत कर्मचारी आपातकालीन स्थिति या कर्फ्यू का बहाना बनाकर काम से अनुपस्थित नहीं रह सकते।
ईंधन की कीमतों और देश की भंडारण क्षमता पर स्थिति
New Delhi अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के पार होने के बावजूद, सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। तेल कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) वर्तमान में लागत का दबाव खुद वहन करेंगी। रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज से, भारत के पास वर्तमान में 74 दिनों का कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार मौजूद है, जो किसी भी बड़े वैश्विक व्यवधान से निपटने में सक्षम है।
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