नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल
दंतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अरनपुर थाना क्षेत्र में एक बार फिर स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली उजागर हुई जब एक महिला को अपनी सास को उल्टी खाट पर बांधकर अस्पताल ले जाने को मजबूर होना पड़ा।
एम्बुलेंस नहीं मिलने पर चार किलोमीटर पैदल सफर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अरनपुर के रहने वाली कोसा पिछले एक महीने से गंभीर बुखार से पीड़ित थीं। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। मजबूर होकर उनकी बहू ने खाट को कांवड़ का रूप देकर अपनी सास को चार किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल पहुंचने पर भी डॉक्टर नदारद
जब पीड़ित महिला अरनपुर अस्पताल पहुंची, तो वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। अस्पताल में इलाज के लिए डॉक्टरों की गैरमौजूदगी ने प्रशासन की लापरवाही को और उजागर कर दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि जब नक्सल प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो वहां के लोग कैसे इलाज करवाएंगे?
स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल
दंतेवाड़ा जिले में यह पहली घटना नहीं है जब एंबुलेंस की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को जान जोखिम में डालनी पड़ी हो। इससे पहले भी कई बार ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जहां ग्रामीणों को मरीजों को चारपाई, साइकिल और यहां तक कि कंधों पर उठाकर अस्पताल ले जाते देखा गया है।
सरकार और प्रशासन से सवाल
आखिर कब तक ग्रामीणों को इस तरह स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से जूझना पड़ेगा?
क्या नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का अधिकार नहीं है?
हर जिले में एंबुलेंस की व्यवस्था के दावे करने वाली सरकार आखिर कब इन वादों को हकीकत में बदलेगी?
जरूरत है ठोस कदम उठाने की
दंतेवाड़ा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, इसके लिए सरकार को तत्काल प्रभाव से अस्पतालों की स्थिति सुधारने और एंबुलेंस सेवाओं को सुचारू रूप से संचालित करने की आवश्यकता है।
यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह लापरवाही कई और निर्दोष लोगों की जान ले सकती है।





