₹16,700 करोड़ का दांव! नवी मुंबई एयरपोर्ट पर अडानी ग्रुप की सरकार से बड़ी मांग

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नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जुलाई में हो सकता है शुरू

नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NMIA) के जुलाई 2025 में शुरू होने की संभावना है, और इसके साथ ही भारत के एविएशन सेक्टर में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। लेकिन इस ग्रैंड लॉन्च से पहले ही कुछ बड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं—खासतौर पर एयरलाइन कंपनियों की ओर से।

जहां एक ओर अडानी ग्रुप ने इस प्रोजेक्ट में करीब ₹16,700 करोड़ का निवेश किया है, वहीं एयरलाइन कंपनियां उच्च शुल्क और टैरिफ स्ट्रक्चर के चलते नए एयरपोर्ट पर शिफ्ट होने को लेकर हिचकिचा रही हैं।


क्या है एयरलाइंस की आपत्ति?

नवी मुंबई एयरपोर्ट पर:

  • लैंडिंग और पार्किंग चार्जेस मौजूदा मुंबई एयरपोर्ट की तुलना में काफी ज्यादा हैं।
  • इससे एयरलाइंस को ऑपरेटिंग कॉस्ट में वृद्धि की आशंका है।
  • यात्रियों पर भी यह अतिरिक्त बोझ डाल सकता है, जिससे ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यही स्थिति रही, तो एयरलाइंस नए एयरपोर्ट पर ट्रांसफर होने से परहेज कर सकती हैं।


अडानी ग्रुप की रणनीति: दोनों एयरपोर्ट्स के लिए एक जैसे शुल्क की मांग

अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) ने सरकार से अनुरोध किया है कि:

  • मुंबई और नवी मुंबई एयरपोर्ट्स को एक यूनिट के रूप में ट्रीट किया जाए।
  • दोनों पर समान टैरिफ और शुल्क लागू किए जाएं।
  • इससे NMIA को ट्रैफिक आकर्षित करने में मदद मिलेगी और यात्रियों को एक बेहतर विकल्प मिलेगा।

इस मांग का आधार है AERA (Airports Economic Regulatory Authority) एक्ट का 2021 संशोधन, जिसमें ग्रुप एयरपोर्ट्स की अवधारणा को मान्यता दी गई है।


दोनों एयरपोर्ट्स के राजस्व मॉडल में अंतर

एयरपोर्टराजस्व हिस्सेदारी
मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट38.7% AAI को देना होता है
नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट12.6% CIDCO को देना होता है

इस फर्क की वजह से नवी मुंबई एयरपोर्ट अधिक मुनाफा कमाने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि अडानी ग्रुप ज्यादा एयरलाइंस को वहां लाने की कोशिश कर रहा है।


पहली उड़ान: इंडिगो होगी लीड एयरलाइन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडिगो नवी मुंबई एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाली पहली एयरलाइन होगी। हालांकि, अन्य कंपनियों की तरफ से अब तक हिचकिचाहट देखी जा रही है।


AERA कैसे तय करता है एयरपोर्ट चार्जेस?

AERA हर 5 साल में चार्जेस तय करता है और इसमें शामिल होते हैं:

  • पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure)
  • संचालन लागत (Operational Cost)
  • मूल्यह्रास (Depreciation)
  • गैर-एयरोनॉटिकल आय

इससे सुनिश्चित किया जाता है कि ऑपरेटर को उचित लाभ मिले, लेकिन यात्रियों पर अधिक बोझ न पड़े।


क्या यह पूरे देश के लिए एक मिसाल बनेगा?

भारत में 15 शहरों में दो एयरपोर्ट्स ऑपरेट हो रहे हैं। अगर अडानी ग्रुप की यह मांग स्वीकार होती है, तो यह भविष्य में एयरपोर्ट पॉलिसी का आधार बन सकता है।

हालांकि, AERA के पूर्व अधिकारी इस प्रस्ताव को “अनुचित लाभ” के रूप में भी देख रहे हैं, क्योंकि दोनों एयरपोर्ट्स के स्वामित्व और अनुबंध भिन्न हैं।


निष्कर्ष: आगे क्या हो सकता है?

  • अगर सरकार अडानी ग्रुप की मांग मानती है, तो NMIA को ज्यादा ट्रैफिक मिल सकता है।
  • इससे यात्रियों को भी विकल्प मिलेगा और भीड़भाड़ वाले मुंबई एयरपोर्ट पर दबाव कम होगा।
  • लेकिन अगर शुल्क कम नहीं हुए, तो एयरलाइंस की नाराजगी NMIA की सफलता में बाधा बन सकती है।

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