Narad Jayanti Lecture : नारद जयंती पर पत्रकारिता के मूल्यों पर विशेष चर्चा
Narad Jayanti Lecture : कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा देवर्षि नारद जयंती के अवसर पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का विषय “राष्ट्रवादी पत्रकारिता में स्व का बोध” रहा, जिसमें मीडिया की भूमिका, पत्रकारिता के मूल्य और राष्ट्र निर्माण में संचार की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई।

Narad Jayanti Lecture : नारद की लोकछवि और वास्तविक स्वरूप पर विचार
कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए भारतीय जन संचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि देवर्षि नारद की लोकछवि अक्सर गलत तरीके से प्रस्तुत की गई है। उन्हें झगड़ा कराने वाला बताया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि उनके प्रत्येक संवाद में लोकमंगल की भावना निहित होती है।उन्होंने कहा कि नारद जी ईश्वर के दूत के रूप में कार्य करते हुए हमेशा उद्देश्यपूर्ण संवाद करते हैं। उनके जीवन से पत्रकारों को तीन महत्वपूर्ण गुण सीखने चाहिए—विश्वसनीयता, सतत प्रवास और उद्देश्य की पवित्रता।
Narad Jayanti Lecture : नारद संवाद से लोकमंगल की प्रेरणा
प्रो. द्विवेदी ने कहा कि देवर्षि नारद देवताओं, राक्षसों और समाज के हर वर्ग से संवाद रखते हैं। वे सभी के सलाहकार, मित्र और मार्गदर्शक हैं। उनका जीवन निरंतर संवाद और लोकहित के लिए समर्पित रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि नारद जी कोई आश्रम या मठ नहीं बनाते, बल्कि निरंतर प्रवास करते हुए समाज से जुड़े रहते हैं। उनका हर संवाद समाज में सकारात्मक परिवर्तन और लोकमंगल को बढ़ावा देता है।
Narad Jayanti Lecture : ‘स्व’ का बोध राष्ट्र विकास की आधारशिला
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि भारतीय परंपरा में देवर्षि नारद को प्रथम पत्रकार माना जाता है, जिन्होंने हमेशा सत्य और लोकहित को प्राथमिकता दी।उन्होंने कहा कि आज के समय में पत्रकारिता के मूल्यों को बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। संस्कृति, कर्तव्य और परंपरा का शाश्वत परिचय ही ‘स्व’ का बोध है, और यही ‘स्व’ का बोध राष्ट्र के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
Narad Jayanti Lecture : पत्रकारिता को लेकर महत्वपूर्ण संदेश
विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि यह केवल एक जयंती नहीं, बल्कि पत्रकारिता के मूल्यों पर आत्ममंथन का अवसर है। उन्होंने कहा कि सूचना की गति से अधिक उसकी सत्यता और उद्देश्य महत्वपूर्ण है।संयोजक डॉ. हरिओम कुमार ने कहा कि वैश्विक संवाद के लिए “नारद संचार मॉडल” को अपनाने की आवश्यकता है। वहीं संचालन करते हुए डॉ. ओम शंकर गुप्ता ने नारद जी की कार्यशैली को मीडिया के लिए मार्गदर्शक बताया।
Narad Jayanti Lecture : छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी
कार्यक्रम में सह आचार्य डॉ. योगेंद्र कुमार पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इसके अलावा डॉ. जितेंद्र डबराल, प्रेम किशोर शुक्ला, सागर कनौजिया सहित कई शिक्षक और छात्र-छात्राएं ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

