मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर कर्ज लेने की तैयारी में है। इस बार सरकार 4500 करोड़ रुपए का भारी-भरकम कर्ज लेने जा रही है। सरकार का दावा है कि ये पैसा विकास कार्यों, योजनाओं और जरूरी खर्चों के लिए इस्तेमाल होगा। लेकिन सवाल उठता है — क्या बार-बार कर्ज लेना प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है?
दो किश्तों में मिलेगा कर्ज
इस बार का कुल कर्ज 4500 करोड़ रुपए होगा, जिसे दो भागों में लिया जाएगा:
- पहली किश्त: 2000 करोड़ रुपए
- दूसरी किश्त: 2500 करोड़ रुपए
इससे पहले मई में भी सरकार ने दो बार में कुल 5000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। यानी इस नए कर्ज के साथ मौजूदा वित्त वर्ष में एमपी सरकार कुल 9500 करोड़ रुपए उधार ले चुकी है।
अब तक कितना कर्ज चढ़ चुका है?
नए कर्ज को मिलाकर अब राज्य सरकार पर कुल 4.31 लाख करोड़ रुपए का बकाया कर्ज हो जाएगा। ये आंकड़ा निश्चित तौर पर चिंता का विषय है।
कर्ज का इस्तेमाल कहां होगा?
सरकार ने कहा है कि ये कर्ज कई जरूरी कार्यों में खर्च किया जाएगा, जैसे:
- विकास कार्यों की फंडिंग
- कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देने
- ‘लाड़ली बहना योजना’ की किश्तें जमा करने
- मानसून से पहले किए गए निर्माण कार्यों की पेमेंट
यानी, सरकार इन फंड्स को इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाओं के लिए खर्च करने की योजना बना रही है।
कब और कैसे होगा कर्ज का भुगतान?
राज्य वित्त विभाग के मुताबिक:
- 3 जून को यह कर्ज आरबीआई के ज़रिए लिया जाएगा।
- 4 जून को इसका पेमेंट किया जाएगा।
लोन की शर्तें:
- पहला लोन (2000 करोड़ रुपए):
- अवधि: 16 साल
- अंतिम भुगतान: 4 जून 2041
- दूसरा लोन (2500 करोड़ रुपए):
- अवधि: 18 साल
- अंतिम भुगतान: 4 जून 2043
इसका मतलब यह है कि आने वाले लगभग दो दशकों तक प्रदेश सरकार को इन कर्जों पर ब्याज समेत भुगतान करना होगा।
मई में भी लिए गए थे दो कर्ज
सरकार ने 7 मई को भी दो किश्तों में 5000 करोड़ रुपए का कर्ज उठाया था:
- पहली किश्त: 2500 करोड़ रुपए (12 साल की अवधि, भुगतान 2037 तक)
- दूसरी किश्त: 2500 करोड़ रुपए (14 साल की अवधि, भुगतान 2039 तक)
लगातार इस तरह के कर्ज यह संकेत देते हैं कि सरकार को चालू खर्च चलाने के लिए भी बाहरी फंडिंग की जरूरत पड़ रही है।
लेकिन सरकार कह रही है, “हमारी आमदनी अच्छी है”
सरकार इस आलोचना का जवाब देते हुए कहती है कि उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में राज्य को 12487 करोड़ रुपए का राजस्व सरप्लस रहा।
आंकड़े देखें तो:
- राजस्व (आमदनी): 2,34,026 करोड़ रुपए
- खर्च: 2,21,538 करोड़ रुपए
- सरप्लस: 12,487 करोड़ रुपए
सरकार का कहना है कि जब आमदनी खर्च से ज्यादा है, तो कर्ज लेना ‘विकास को तेज़ करने’ का जरिया है, न कि कोई संकट।
विकास या वित्तीय दबाव?
बार-बार कर्ज लेना किसी भी सरकार के लिए अलार्म बेल हो सकता है, लेकिन अगर उस कर्ज का इस्तेमाल सही दिशा में हो — जैसे कि इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक योजनाएं और कर्मचारियों के हित में — तो इसका सकारात्मक असर भी हो सकता है।





