जब सत्ता असीम हो जाए
क्या आपने कभी सोचा है कि किसी तानाशाह का सबसे बड़ा सपना क्या होता है? अनंत सत्ता, असीम ताकत और कभी न खत्म होने वाला शासन। आज की दुनिया में, ऐसे कई नेता हैं जिन्होंने लोकतंत्र की सीमाएं तोड़कर खुद को सत्ता में हमेशा के लिए कायम कर लिया है — व्लादिमीर पुतिन (रूस, 25 साल), शी जिनपिंग (चीन, 12 साल), अर्दोआन (तुर्की, 22 साल) और अली खामनेई (ईरान, 36 साल) जैसे नाम तो आपने सुने ही होंगे।
अब इस सूची में एक नया नाम जुड़ने जा रहा है — असीमी गोइता, माली के फौजी जनरल, जो अब देश के अंतरिम राष्ट्रपति बन चुके हैं।
असीमी गोइता: एक जनरल से “लीडर फॉर लाइफ” तक
- 2021 में गोइता ने माली की सिविल सरकार का तख्तापलट किया।
- शुरुआत में चुनाव कराने का वादा किया, लेकिन अब 2030 तक राष्ट्रपति पद पर बने रहने का कानून पास करवा लिया।
- नया कानून उन्हें कार्यकाल को आगे बढ़ाने का भी अधिकार देता है — यानी सत्ता अब उनकी मुट्ठी में है।
माली: एक खूबसूरत लेकिन अस्थिर देश
माली की भौगोलिक और सांस्कृतिक झलक
- पश्चिम अफ्रीका का लैंडलॉक देश, जिसकी सीमा 7 देशों से लगती है।
- राजधानी बामाको और ऐतिहासिक शहर टिंबकटू, जो कभी इस्लामी शिक्षा का बड़ा केंद्र था।
- देश की 2.4 करोड़ की आबादी, जिनमें 95% मुस्लिम हैं।
- माली में 65% क्षेत्र रेगिस्तान है, और गर्मी इतनी कि तापमान 50°C तक पहुंच जाता है।
- यहाँ की “ग्रेट मस्जिद ऑफ जेने” दुनिया की सबसे बड़ी मिट्टी से बनी इमारत है।
- माली, अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश है।
तख्तापलटों का इतिहास: माली की स्थायी कहानी
माली में अब तक 5 बार सैन्य तख्तापलट हो चुका है:
- 1968: मूसा त्राओरे ने सत्ता संभाली।
- 1991: अमादो तोमानी तोरे ने त्राओरे को हटाया।
- 2012: कैप्टन अमादो सानोगू का तख्तापलट।
- 2020: जनरल असीमी गोइता का पहला तख्तापलट।
- 2021: गोइता का दूसरा तख्तापलट, जिसके बाद वे राष्ट्रपति बने।
2020-2021: माली की राजनीति का टर्निंग पॉइंट
- 2018 में इब्राहिम बूबकर केता फिर से राष्ट्रपति बने।
- उनके कार्यकाल में आतंकी हमलों और आर्थिक बदहाली ने माली को हिला दिया।
- 2020 के चुनाव में धांधली के आरोप लगे — विपक्षी नेताओं की किडनैपिंग और चुनावी नतीजों में हेरफेर ने विरोध को भड़काया।
- इसी असंतोष का फायदा उठाकर गोइता ने तख्तापलट कर दिया।
गोइता की चार प्रमुख ‘उपलब्धियां’
1. फ्रांस को बाहर निकालना
- माली कभी फ्रांस का उपनिवेश था। 2013 से फ्रांस की सेना आतंकवाद से लड़ रही थी।
- 2022 में गोइता ने फ्रांस को माली से पूरी तरह बाहर कर दिया।
2. रूस और चीन से संबंध मजबूत करना
- फ्रांस के जाने के बाद, रूसी प्राइवेट सेना वेगनर को माली बुलाया गया।
- रूस से हथियार, हेलीकॉप्टर, और रडार सिस्टम भी खरीदे गए।
3. आतंकवाद के खिलाफ अभियान
- अलकायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों से लड़ाई तेज की गई।
- हालाँकि, नागरिकों की मौतें हुईं, जिससे मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगे।
4. नए संगठन का गठन
- माली ने G5 सालेह और ECOWAS जैसी क्षेत्रीय संस्थाओं को छोड़ दिया।
- नाइजर और बुर्किना फासो के साथ मिलकर “Alliance of Sahel States” का गठन किया गया।
गोइता की आलोचनाएं: तीन बड़े आरोप
- नागरिकों की हत्या: वेगनर के साथ मिलकर आम लोगों पर हमले के आरोप।
- पश्चिम से दूरी: सहायता और सहयोग में कमी, UN की शांति सेना को भी माली छोड़ना पड़ा।
- चुनाव नहीं कराना: लोकतांत्रिक प्रक्रिया ठप, टर्म एक्सटेंशन के बाद तानाशाही का आरोप।
गोइता कौन हैं? जानिए उनका बैकग्राउंड
- 9 नवंबर 1983 को जन्मे गोइता के पिता सेना में अधिकारी थे।
- अमेरिका, फ्रांस, और जर्मनी से काउंटर टेररिज्म की ट्रेनिंग ली।
- 2018 में कर्नल बनकर माली स्पेशल फोर्सेस की कमान संभाली।
- आज वे माली की सबसे ताकतवर हस्ती बन चुके हैं।
निष्कर्ष: माली का भविष्य अधर में
असीमी गोइता की सत्ता को देखकर सवाल उठता है — क्या वह माली को स्थिरता और सुरक्षा दे पाएंगे या इसे और गहराई में धकेलेंगे?
तानाशाही के लंबे इतिहास वाले अफ्रीका में एक और नाम जुड़ गया है। लेकिन क्या यह नाम सुधार का प्रतीक बनेगा या दमन और सत्ता लोलुपता का?





