BY
Yoganand Shrivastava
Maha Shivaratri वाराणसी/उज्जैन: महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आज पूरा देश शिव भक्ति के रंग में डूबा हुआ है। काशी विश्वनाथ से लेकर रामेश्वरम तक, सभी प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में भक्तों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा है। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के साथ महोत्सव का शंखनाद हुआ, जहाँ आस्था का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।
महाकाल मंदिर में विशेष भस्म आरती और पंचामृत अभिषेक
Maha Shivaratri उज्जैन में बाबा महाकाल की नगरी में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत भव्य तरीके से मनाया जा रहा है। तड़के 3 बजे बाबा का पंचामृत अभिषेक (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) किया गया, जिसके बाद उन्हें चंदन और भांग से दिव्य रूप में श्रृंगारित किया गया। शंखनाद और ढोल-नगाड़ों के बीच हुई विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुँचे हैं। प्रशासन के अनुसार, अगले 44 घंटों तक मंदिर के पट दर्शनार्थियों के लिए निरंतर खुले रहेंगे।

शिव नवरात्रि का उल्लास: जब ‘दूल्हा’ बने बाबा महाकाल
Maha Shivaratri उज्जैन में महाशिवरात्रि केवल एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि एक विवाह उत्सव है। यहाँ पिछले 9 दिनों से शिव नवरात्रि मनाई जा रही थी, जिसमें बाबा को प्रतिदिन हल्दी-चंदन लगाकर दूल्हे की तरह सजाया गया। महाशिवरात्रि के अगले दिन (16 फरवरी) बाबा का ‘सेहरा’ सजाया जाएगा। यह वर्ष का एकमात्र ऐसा दिन होता है, जब दोपहर में भस्म आरती की जाती है। मान्यता है कि सेहरे के पुष्प और पंखुड़ियाँ घर में रखने से सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति होती है।

दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग का महात्म्य और देशव्यापी उत्सव
Maha Shivaratri बारह ज्योतिर्लिंगों में केवल महाकालेश्वर ही दक्षिणमुखी हैं, जिन्हें ‘काल का भी काल’ माना जाता है। इस बार महाशिवरात्रि पर उज्जैन में 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुँचने की संभावना है। वहीं, काशी विश्वनाथ में भी भक्तों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लगी हैं। देश के हर छोटे-बड़े मंदिर में जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक का दौर जारी है, जिससे पूरा वातावरण ‘बम-बम भोले’ के उद्घोष से शिवमय हो गया है।





