Madhya Pradesh भोपाल: मध्यप्रदेश विधानसभा परिसर में मंगलवार को एक गरिमामयी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की जयंती पर उनके चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, पूर्व मंत्री श्री पी.सी. शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधियों और स्व. शुक्ल के परिजनों ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
जन जागरण और संसदीय मर्यादाओं के प्रहरी
Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्व. शुक्ल के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 10 फरवरी 1930 को जन्मे श्री राजेंद्र प्रसाद शुक्ल एक प्रखर वक्ता और लोकप्रिय जननेता थे। उन्होंने तत्कालीन मध्यप्रदेश के छत्तीसगढ़ अंचल में पदयात्राओं के माध्यम से आमजन को जागरूक करने का ऐतिहासिक कार्य किया। वे केवल एक राजनेता नहीं बल्कि संसदीय नियमों के गहरे जानकार भी थे, जिन्होंने 1985 से 1990 तक मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में सदन की गरिमा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
छत्तीसगढ़ के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष का गौरव
Madhya Pradesh स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ल का राजनीतिक कद इतना विशाल था कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद उन्हें वहां की प्रथम विधानसभा का अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ। उन्होंने 14 दिसंबर 2000 से 19 दिसंबर 2003 तक छत्तीसगढ़ विधानसभा का कुशल संचालन किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने शासन में विधि-विधायी एवं सामान्य प्रशासन मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। विधायी कामकाज को सुगम बनाने के लिए उनके द्वारा संकल्पित पुस्तक ‘असंसदीय अभिव्यक्तियां’ आज भी संसदीय कामकाज के लिए एक प्रमुख संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।
महापुरुषों के सम्मान की नई परंपरा
Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर की इस नई पहल की सराहना की, जिसके तहत प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रहे महानुभावों की जयंती और पुण्यतिथि पर विधानसभा भवन में उन्हें स्मरण किया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी परंपराओं से नई पीढ़ी को राज्य के निर्माताओं और संवैधानिक पदों की गरिमा बढ़ाने वाले व्यक्तित्वों के बारे में जानने का अवसर मिलता है।





