रिपोर्ट: इम्तियाज अंसारी
Madhupur : नगर परिषद की राजनीति में उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया, जब नवनिर्वाचित अध्यक्ष दरक्शां परवीन की जीत कानूनी विवादों के घेरे में आ गई। भाजपा समर्थित उपविजेता मिती कुमारी ने मधुपुर सिविल कोर्ट में याचिका दायर कर अध्यक्ष के निर्वाचन को चुनौती दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले के बाद अब सबकी नजरें न्यायालय के अगले कदम पर टिकी हैं।
Madhupur शपथ पत्र में तथ्य छिपाने का आरोप
याचिकाकर्ता मिती कुमारी का आरोप है कि दरक्शां परवीन ने नामांकन के दौरान दाखिल शपथ पत्र में अपनी जाति और कई अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई हैं।
- अधिनियम का हवाला: याचिका में झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 की धारा 580 के तहत चुनावी अनियमितता और गलतबयानी का दावा किया गया है।
- आरक्षण का मुद्दा: वादी पक्ष का कहना है कि आरक्षण का लाभ लेने के उद्देश्य से दस्तावेजों में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, जो सीधे तौर पर चुनाव प्रक्रिया का उल्लंघन है।
Madhupur अध्यक्ष का पलटवार: “आरोप बेबुनियाद, दर्ज कराऊँगी मानहानि”
मामले के तूल पकड़ने के बाद अध्यक्ष दरक्शां परवीन ने प्रेस वार्ता कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने मिती कुमारी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद और निराधार करार दिया।
- कानूनी कार्रवाई की चेतावनी: उन्होंने कहा कि उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है और वे जल्द ही मिती कुमारी पर मानहानि का मामला दर्ज कराएंगी।
- न्यायालय पर भरोसा: अध्यक्ष और उनके परिवार ने न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि वे कोर्ट में अपनी सच्चाई साबित करेंगे।
Madhupur मधुपुर की सियासत में हलचल
नगर परिषद चुनाव के बाद यह पहला बड़ा कानूनी विवाद है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। एक तरफ जहाँ विपक्षी खेमा दस्तावेजों की जांच की मांग कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे चुनावी हार की हताशा बता रहा है। फिलहाल मामला न्यायालय के अधीन है और कोर्ट का फैसला ही तय करेगा कि मधुपुर नगर परिषद की कमान किसके हाथ में रहेगी।





