Report: Amit verma
विश्व एड्स दिवस के मौके पर लोहरदगा जिले से मिली ताज़ा स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। जिला आईसीटीसी के अनुसार फिलहाल एचआईवी के 120 मरीज उपचाराधीन हैं, जबकि अप्रैल 2025 से अब तक 12 नए मामले सामने आए हैं। आम तौर पर जिले में हर वर्ष 9–10 नए मामले आते थे, लेकिन इस वर्ष आठ महीने में ही दर्जनभर मरीजों की पहचान हो चुकी है, जिससे हालात अधिक गंभीर दिखाई दे रहे हैं। सक्रिय मरीजों में 9 बच्चे, 36 महिलाएं और 2 गर्भवती महिलाएं शामिल हैं, जबकि बाकी संख्या पुरुषों की है। पिछले कुछ वर्षों में एचआईवी से 25 लोगों की मौत भी दर्ज की गई है।
आईसीटीसी काउंसलर डॉ. अर्चना प्रसाद ने बताया कि युवाओं में जागरूकता की कमी, इंटरनेट पर उपलब्ध गुमनाम प्लेटफॉर्मों के माध्यम से बिना पहचान साझा किए मिलने-जुलने की बढ़ती प्रवृत्ति और असुरक्षित यौन संबंध इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं। कई किशोर और युवा अध्ययन के बहाने मिलते हैं और पर्याप्त सावधानी न बरतने के कारण संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोहरदगा जैसे छोटे जिले में लगातार बढ़ रहे मामलों से संकेत मिलता है कि राज्य और देश में भी स्थिति को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। सुरक्षित व्यवहार, समय पर जांच और जागरूकता ही संक्रमण को रोकने के सबसे प्रभावी उपाय हैं।





