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Koriya: धान खरीदी के टोकन नहीं मिलने से हाहाकार, ठंड में किसानों की जद्दोजहद जारी

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रिपोर्ट – चन्द्रकान्त पारगीर

Koriya: धान खरीदी सीजन के बीच कोरिया जिले में टोकन कटवाने की परेशानी किसानों के लिए बड़ा संकट बन गई है। कड़ाके की ठंड में किसान सुबह 4 बजे से ही धान खरीदी केंद्रों के बाहर लंबी कतारों में खड़े हैं, लेकिन इसके बावजूद टोकन मिलना बेहद मुश्किल हो गया है।

बैकुंठपुर से दूरस्थ ग्रामीण अंचलों सोंस, गढ़तर, मनसुख और गोविंदपुर से पहुंचे किसान कई घंटों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। भीड़ इतनी अधिक है कि कई बुजुर्ग किसान घंटों इंतजार के बाद भी टोकन कटवाए बिना ही वापस लौटने को मजबूर हो रहे हैं।

दस्तावेज़ों से नंबरिंग कर रहे किसान

टोकन पाने की होड़ में किसान अपनी बारी बनाए रखने के लिए दस्तावेजों को कुर्सियों पर रखकर नंबर दे रहे हैं, जिससे प्राथमिकता तय हो सके। सुबह 4 बजे से 10 बजे तक इंतजार करने के बावजूद भी कई किसानों के हाथ निराशा ही लग रही है।

खरीदी लिमिट आधी होने से बढ़ी भीड़

किसानों के अनुसार इस वर्ष धान खरीदी की लिमिट पिछले साल की तुलना में लगभग आधी कर दी गई है, जिसके चलते टोकन की संख्या बेहद कम हो गई है। इसी वजह से केंद्रों में भारी भीड़ उमड़ रही है और टोकन वितरण की प्रक्रिया ठप जैसी हो गई है।

प्रशासन से समाधान की उम्मीद

किसानों का कहना है कि ठंड, भीड़ और कम लिमिट की वजह से उनकी तकलीफें बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रशासन कब तक हालात पर ध्यान देगा और क्या टोकन व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में 2025 में धान खरीदी किस आधार पर हो रही है

वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ सरकार धान खरीदी की प्रक्रिया को और पारदर्शी, तकनीकी और किसान-हितैषी बनाने पर विशेष जोर दे रही है। इस वर्ष धान खरीदी का आधार मुख्य रूप से समर्थन मूल्य (MSP), डिजिटल पंजीकरण, भूमि-आधारित सीमा, और बायोमैट्रिक सत्यापन पर रखा गया है।

सबसे पहले, राज्य सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर ही किसानों से धान खरीदा जा रहा है। खरीदी का समय 15 नवंबर से जनवरी के अंत तक तय किया गया है, ताकि सभी किसानों को अपनी उपज बेचने का पर्याप्त अवसर मिल सके। धान खरीदी के लिए किसान को पहले से पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इस बार पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन किया गया है, जिसमें ई-केवाईसी और आधार सत्यापन शामिल है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल वास्तविक किसान ही अपने नाम से बिक्री कर सकें।

धान खरीदी की मात्रा भी प्रति एकड़ निर्धारित सीमा के आधार पर तय की जाती है। राज्य सरकार द्वारा प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल तक खरीदी की अनुमति दी गई है। इससे खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है और अनियमितताओं की संभावना कम होती है।

प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए सरकार ने ऑनलाइन टोकन प्रणाली लागू की है, जिसके तहत किसान मोबाइल ऐप या पोर्टल से अपनी बारी के अनुसार टोकन प्राप्त कर सकते हैं। टोकन मिलने के बाद ही किसान को खरीदी केंद्र पहुंचने की अनुमति होती है। केंद्रों पर पहुंचने के बाद किसान का बायोमैट्रिक सत्यापन किया जाता है, जिससे किसी भी तरह की फर्जी बिक्री पर रोक लगाई जा सके।

इस वर्ष धान खरीदी में तौल मशीनों का डिजिटलीकरण, रियल-टाइम डेटा अपडेट, और भुगतान प्रक्रिया को तेज करने के लिए डीबीटी (Direct Benefit Transfer) प्रणाली को मजबूत किया गया है। कुल मिलाकर, 2025 में धान खरीदी पूरी तरह तकनीक-आधारित, पारदर्शी और किसान-हितैषी प्रावधानों पर आधारित है।

संपादीय नजरिया:

छत्तीसगढ़ में 2025 की धान खरीदी व्यवस्था तकनीकी पारदर्शिता और किसान हितों का संतुलित मॉडल प्रस्तुत करती है। डिजिटल पंजीकरण, टोकन सिस्टम और बायोमैट्रिक सत्यापन ने प्रक्रिया को सुगम बनाया है। समर्थन मूल्य पर खरीदी से किसानों को भरोसा मिला है, पर निगरानी और भुगतान की गति निरंतर सुधार की मांग करती है।
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