Blue Water Mine Accident : खदान क्यों नहीं बंद, सरकार ने कहा- करेंगे प्रबंध,एक शर्त, एक छलांग, जिंदगी पर मौत का दांव
Blue Water Mine Accident : रायपुर की ब्लू वाटर खदान… खूबसूरत नजर आने वाला ये इलाका अब लगातार मौत का कारण बनता जा रहा है। बंद पड़ी इस खदान में डूबने की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। साल 2017 से अब तक यहां 10 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। ऐसे में सवाल सिर्फ हादसों का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और जागरूकता का भी है। बारिश के बाद खदान पानी से भर जाती है और दूर से यह किसी झील या तालाब जैसी दिखाई देती है। इसी वजह से युवा यहां घूमने, पिकनिक मनाने और नहाने पहुंचते हैं। लेकिन इसी खूबसूरती के पीछे छिपा है 100 से 150 फीट, बल्कि कुछ हिस्सों में इससे भी ज्यादा गहरा पानी। एक छोटी सी लापरवाही जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। उधर इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार से सवाल कर रही है तो वहीं सरकार की ओर से प्रबंध करने की बात कही जा रही है। जिससे हादसों को रोका जा सके।
Blue Water Mine Accident : रायपुर के माना थाना क्षेत्र स्थित ब्लू वाटर खदान में आदिल खान के डूबने के 48 घंटे बाद भी शव बरामद नहीं हो सका है। मौदहापारा निवासी 24 वर्षीय आदिल अपने तीन दोस्तों के साथ यहां पहुंचा था। इसी दौरान एक छोर से दूसरे छोर तक पानी पार करने की शर्त लगाई गई। आदिल और उसके दोस्त तैफिक ने पानी में छलांग लगाई, लेकिन आधे रास्ते में आदिल की सांस फूल गई और वह गहरे पानी में डूब गया। हादसे के बाद SDRF और स्कूबा डाइविंग टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। खदान की गहराई रेस्क्यू टीम के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। टीम करीब 55 से 60 फीट तक ही सर्च कर पा रही है, जबकि खदान की गहराई इससे कहीं अधिक बताई जा रही है। परिजन लगातार शव बरामद करने की मांग कर रहे हैं।
Blue Water Mine Accident : लेकिन ब्लू वाटर में यह पहला हादसा नहीं है। लगातार मौतों के बावजूद सवाल यही है कि आखिर लोग इस खतरनाक जगह तक पहुंच कैसे रहे हैं ? प्रशासन की ओर से प्रतिबंधित क्षेत्र का बोर्ड लगाया गया है, जो नाकाफी है। राजनीतिक स्तर पर भी इस घटना के बाद खदान की सुरक्षा और लोगों की आवाजाही रोकने की मांग उठी है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का कहना है जब खदान बंद हो चुकी है तो सरकार को तत्काल प्रभाव से इतनी मौत का इंतजार नहीं करना चाहिए इसे जल्द से जल्द बंद करना चाहिए। वहीं सरकार की ओर से भी ऐसे इलाकों में लोगों का आवागमन रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही गई है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव का कहना है घटना हृदय धारक है जल्द से जल्द प्रशासन इस पर आवागमन रोकने के लिए कदम उठाएंगे। सबसे जरूरी संदेश यही है ब्लू वाटर कोई पर्यटन स्थल नहीं है। यहां जाना, पानी में उतरना या तैरने की कोशिश करना अपनी जान को खतरे में डालना है। ब्लू वाटर की गहराई को रोमांच नहीं, खतरे की चेतावनी समझिए।


