उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन अपनी मशहूर हरी बुलेटप्रूफ ट्रेन से 20 घंटे का सफर तय करके चीन पहुंचे। वे यहां द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित सैन्य परेड में शामिल होने आए हैं। इस खास मौके पर उनके साथ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी मौजूद रहेंगे।
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किम जोंग उन और उनकी ट्रेन का इतिहास
- यह किम जोंग उन की साल 2023 के बाद पहली विदेश यात्रा है।
- उनके पिता और दादा भी इसी ट्रेन से यात्रा करते थे।
- यही वजह है कि यह ट्रेन उत्तर कोरिया की सत्ता और परंपरा दोनों की पहचान मानी जाती है।
ट्रेन की खासियतें जो इसे बनाती हैं अनोखा
किम जोंग उन की यह ट्रेन एक चलती-फिरती सुरक्षा चौकी जैसी है।
- पूरी ट्रेन बुलेटप्रूफ कवच से ढकी हुई है।
- ट्रेन की रफ्तार बेहद कम है – सामान्य तौर पर 45 किमी/घंटा, जबकि चीन में प्रवेश करते ही यह 80 किमी/घंटा तक पहुंचती है।
- इसमें 20 से ज्यादा डिब्बे हैं जिनमें लग्जरी सुइट्स, कॉन्फ्रेंस रूम और आधुनिक संचार सुविधाएं मौजूद हैं।
- ट्रेन तीन हिस्सों में बंटी होती है – आगे सुरक्षा जांच वाले डिब्बे, बीच में किम जोंग उन का कोच और पीछे सामान ले जाने वाले डिब्बे।
प्योंगयांग से बीजिंग तक का सफर
किम जोंग उन की ट्रेन का रूट भी काफी दिलचस्प है।
- ट्रेन प्योंगयांग स्टेशन से चलकर प्योंगुई रेलवे लाइन पर सिनुइजु पहुंचती है।
- यहां से यह यालू नदी के मैत्री पुल को पार कर चीन के डांडोंग शहर में दाखिल होती है।
- इसके बाद शेनयांग और मांचुरिया की पहाड़ियों से गुजरते हुए ट्रेन बीजिंग पहुंचती है।
- इस सफर में ट्रेन को लगभग 177 पुल और 5 सुरंगों को पार करना पड़ता है।
चीन क्यों गए किम जोंग उन?
किम जोंग उन का यह दौरा केवल परेड के लिए नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने भी हैं।
- चीन लंबे समय से उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा सहयोगी रहा है।
- अमेरिका और दक्षिण कोरिया आरोप लगाते हैं कि उत्तर कोरिया ने रूस को यूक्रेन युद्ध में मदद दी है।
- ऐसे में बीजिंग परेड में किम जोंग उन का पुतिन और शी जिनपिंग के साथ दिखना तीनों देशों की दोस्ती का मजबूत संदेश देता है।
किम जोंग उन की हरी बुलेटप्रूफ ट्रेन सिर्फ एक यात्रा का साधन नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा, ताकत और परंपरा का प्रतीक है। बीजिंग तक 20 घंटे का यह सफर उनकी विदेश यात्राओं की खास पहचान बन गया है।





