BY: MOHIT JAIN
कर्नाटक के चामराजनगर ज़िले के गुंडलुपेट तालुक के बोम्मलापुर गांव से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। गांव के लोगों ने वन विभाग की कथित लापरवाही से नाराज़ होकर सात कर्मचारियों – जिनमें गार्ड और वॉचर शामिल थे – को उसी पिंजरे में बंद कर दिया, जिसे बाघ को पकड़ने के लिए लगाया गया था।
ग्रामीणों की नाराज़गी क्यों बढ़ी
गांव के लोगों का कहना है कि पिछले कई महीनों से जंगली जानवर उनके मवेशियों और खेतों पर हमला कर रहे हैं। कई बार इंसानों पर भी हमले हुए हैं। इसके बावजूद वन विभाग ने न तो बाघ या अन्य हिंसक जानवरों को पकड़ा और न ही किसानों को किसी तरह का मुआवज़ा दिया। लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
अनोखा विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर वायरल
ग्रामीणों के इस कदम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वनकर्मियों को बड़े लोहे के पिंजरे में कैद किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक विभाग उनकी समस्या पर ठोस कार्रवाई नहीं करेगा, वे इस तरह के विरोध जारी रखेंगे।
उत्तर कन्नड़ में मवेशियों की हड्डियां मिलने से हड़कंप
इसी बीच, उत्तर कन्नड़ ज़िले के भटकल की मुग्दम कॉलोनी के वन क्षेत्र में बड़ी मात्रा में मवेशियों की हड्डियां मिलने से हड़कंप मच गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस इलाके का इस्तेमाल अवैध पशु वध के लिए किया जा रहा है। दो-तीन दिनों से लगातार अवशेष पहाड़ी क्षेत्र में बिखरे पड़े मिले हैं।
स्थानीय संगठनों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
सूचना मिलने के बाद हिंदू समर्थक संगठनों के सदस्य और सामुदायिक नेता घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि बाद में नगरपालिका कर्मचारियों ने हड्डियों को इकट्ठा कर कूड़ेदान में फेंक दिया। अवशेषों की संख्या देखकर स्थानीय लोग इसे संगठित नेटवर्क की साजिश मान रहे हैं।
पुलिस जांच में जुटी
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उन्हें शिकायतें प्राप्त हुई हैं और जांच चल रही है। एक पुलिस सूत्र के अनुसार, ‘‘हमें खबरों की जानकारी है और हम घटना की जांच कर रहे हैं। आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।’’





