भिंड, 1 अप्रैल 2025 – जीवाजी विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में एक बार फिर नकल का बड़ा मामला सामने आया है। भिंड जिले के लहार सरकारी कॉलेज में चल रही बीए और बीएससी की परीक्षा के दौरान छात्रों ने टॉयलेट को नकल का अड्डा बना लिया था। वहां छिपाकर रखी गई गाइड किताबों से उत्तर कॉपी करते हुए छात्रों का वीडियो वायरल हो गया, जिससे पूरे कॉलेज में हड़कंप मच गया।
कैसे हो रही थी नकल?
- परीक्षा हॉल से छात्र बार-बार टॉयलेट जा रहे थे।
- टॉयलेट के अंदर पहले से गाइड किताबें और नोट्स छिपाए गए थे।
- छात्र वहां जाकर गाइड देखते और उत्तर लिखकर वापस आते।
- कुछ छात्र एक-दूसरे को पैसे देकर नकल करवा रहे थे।
- वीडियो में एक छात्र कहता सुनाई देता है – “प्रिंसिपल साहब मेरे मौसा हैं, इसलिए मुझसे कम पैसे लिए गए।”
कितने पैसे लिए जा रहे थे?
नकल कराने के लिए छात्रों से 5,000 से 10,000 रुपये तक वसूले जा रहे थे। कुछ छात्रों को कम पैसे में नकल की सुविधा मिल रही थी, जबकि अन्य को ज्यादा चुकाना पड़ रहा था।

कॉलेज प्रशासन का रुख
कॉलेज के प्रिंसिपल अंगद दौहरे ने इस मामले को “कॉलेज को बदनाम करने की साजिश” बताया। उनका कहना है कि परीक्षा हॉल में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और नकल की कोई गुंजाइश नहीं है। हालांकि, वीडियो में साफ दिख रहा है कि टॉयलेट में नकल का पूरा इंतजाम था।
भिंड में पहले भी हुए हैं ऐसे मामले
- फूप के ऋषिश्वर महाविद्यालय में सामूहिक नकल का मामला सामने आ चुका है।
- पीएम श्री एमजेएस कॉलेज के प्रिंसिपल ने नकल करते हुए छात्रों को पकड़ा था।
- जैन कॉलेज, यदुनाथ कॉलेज और मेहगांव के दैयपुरिया कॉलेज में भी नकल के मामले पकड़े गए हैं।
अब क्या होगा?
- विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
- परीक्षा नियंत्रक ने कड़ी कार्रवाई का ऐलान किया है।
- जिन छात्रों को नकल करते पकड़ा गया, उनकी परीक्षा रद्द की जा सकती है।
- भविष्य में परीक्षा केंद्रों पर और सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
निष्कर्ष
यह मामला शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है। अगर नकल पर रोक नहीं लगाई गई, तो मेहनत करने वाले छात्रों का हक मारा जाएगा। प्रशासन को ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।