Mohit Jain
भारतीय नौसेना ने एंटी सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट INS माहे को अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। यह समारोह मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में आयोजित हुआ, जहां मुख्य अतिथि के रूप में थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मौजूद रहे। उनके हाथों कमीशनिंग के साथ भारतीय नौसेना की ताकत में बड़ा इजाफा दर्ज हुआ।
80% स्वदेशी तकनीक, आत्मनिर्भर भारत का मजबूत कदम
INS माहे भारतीय नौसेना के उन नए युद्धपोतों में से पहला है, जो उथले समुद्री इलाकों में पनडुब्बी-रोधी ऑपरेशन के लिए तैयार किए गए हैं।
इस जहाज की सबसे खास बात यह है कि इसमें 80% से भी अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
- कोचीन शिपयार्ड में निर्मित
- अत्याधुनिक डिजाइन और तेज रफ्तार
- कम पानी में भी पनडुब्बियों का पता लगाने की क्षमता
INS माहे की तैनाती पश्चिमी समुद्री तट पर एक ‘साइलेंट हंटर’ के रूप में की जाएगी।
#WATCH | मुंबई | थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने INS माहे को भारतीय नौसेना में शामिल किया।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 24, 2025
माहे की कमीशनिंग से कम पानी में लड़ने वाले देसी जहाजों की एक नई पीढ़ी का आगमन हुआ है – जो फुर्तीले, तेज और पक्के इरादे वाले भारतीय होंगे। 80% से ज़्यादा स्वदेशी सामग्री के साथ,… pic.twitter.com/wm4dSAtzab
INS माहे की प्रमुख खूबियां
INS माहे को दुश्मन की पनडुब्बियों का काल इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि:
- यह 78 मीटर लंबा आधुनिक युद्धपोत है
- इसमें अत्याधुनिक सोनार सिस्टम लगा है
- दुश्मन की पनडुब्बियों का पीछा करके उन्हें खत्म करने की क्षमता रखता है
- निगरानी, सुरक्षा और त्वरित आक्रमण-तीनों मोर्चों पर सक्षम
- कई मिशन एक साथ संचालित करने की क्षमता
- शैलो वॉटर में भी ऑपरेशन करने में सक्षम, जहां बड़े युद्धपोत नहीं पहुंच सकते
INS माहे एंटी-सबमरीन वॉरफेयर–शैलो वॉटर क्राफ्ट श्रेणी का पहला स्वदेशी युद्धपोत है।

कमीशनिंग पर क्या बोले थल सेना प्रमुख?
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने INS माहे की कमीशनिंग को भारत की नौसैनिक शक्ति और तकनीकी आत्मनिर्भरता की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा:
- यह जहाज भारत की बढ़ती समुद्री क्षमता का प्रतीक है
- यह तटीय सुरक्षा को मजबूत करेगा
- भारतीय नौसेना को समुद्री प्रभुत्व सुनिश्चित करने में बड़ी बढ़त देगा
- देश की तकनीकी कौशल और नवाचार क्षमता का प्रमाण है
उन्होंने यह भी बताया कि नौसेना में पूंजी अधिग्रहण के 75% से अधिक प्लेटफॉर्म अब स्वदेशी हैं, जो देश की औद्योगिक क्षमता को दर्शाता है।





