सीमा पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर
रिपोर्ट- राजेश जायसवाल, by:vijay nandan
महाराजगंज: नेपाल में पिछले कुछ दिनों हुए उग्र प्रदर्शन के दौरान स्थिति इतनी बिगड़ गई कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के हथियार तक लूट लिए। यही नहीं, सीमा से सटी जेलों सहित अन्य जेलों पर भी हमला हुआ, जिससे करीब 13,000 से ज्यादा कैदी फरार हो गए। हिंसक भीड़ ने सुपरमार्केट्स और सरकारी संपत्तियों में लूटपाट और आगजनी की घटनाओं को अंजाम देकर पूरे नेपाल को हिला कर रख दिया। जो भारत की सीमा से लगे क्षेत्र में घुसपैठ की फिराक में है। लेकिन भारत सरकार की तरफ से जारी हाईअलर्ट के कारण सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैदी से पहरा दे ही हैं।

भारत-नेपाल सीमा पर कड़ी निगरानी
नेपाल में बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत ने भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। भारत-नेपाल सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया है और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
- हर व्यक्ति की गहन जांच – भारत में प्रवेश से पहले हर आने वाले व्यक्ति की सख्ती से तलाशी और पूछताछ की जा रही है।
- गाड़ियों की आवाजाही पर रोक – नेपाल से भारत और भारत से नेपाल जाने वाली सभी गाड़ियों की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगा दी गई है।
- सीमा पर हाई अलर्ट – सीमा के सभी प्रवेश बिंदुओं पर SSB, पुलिस और खुफिया एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ तैनात हैं।

सुरक्षा बलों का बयान
सुरक्षा बलों ने साफ किया है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीमा पार करने की हर कोशिश पर पैनी नजर रखी जा रही है।

नेपाल में हिंसा क्यों भड़की?
स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल में लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक फैसलों के विरोध में प्रदर्शन शुरू हुए। धीरे-धीरे ये विरोध हिंसक रूप ले बैठा।
- प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और प्रशासनिक संस्थानों पर हमला कर दिया।
- कई जगह सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।
- जेलों पर हमले कर हजारों कैदियों को फरार कर दिया गया।
इस अस्थिरता ने न सिर्फ नेपाल बल्कि पड़ोसी भारत के सीमावर्ती जिलों को भी प्रभावित किया है।
नेपाल में हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और तैनाती दोनों देशों की सुरक्षा के लिहाज से अहम कदम है। फिलहाल दोनों देशों की सरकारें मिलकर हालात पर नजर रखे हुए हैं।





