संवाददाता: अविनाश चंद्र
ठेकेदारों की लापरवाही से परेशान लोग
कोयलांचल नगरी चिरमिरी, जिसे काले हीरे की नगरी के रूप में जाना जाता है, इन दिनों गंदगी और अव्यवस्था का शिकार हो रही है। यहां एसईसीएल चिरमिरी कॉलोनियों की स्वच्छता और नालियों की सफाई के नाम पर हर साल करोड़ों रुपए का टेंडर जारी होता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
टेंडर पर करोड़ों की राशि, लेकिन काम सिर्फ कागजों पर
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) चिरमिरी प्रबंधन हर साल कॉलोनियों की साफ-सफाई और गार्बेज कलेक्शन के लिए करोड़ों का टेंडर निकालता है।
- ठेकेदारों पर आरोप है कि वे केवल कागजों पर खानापूर्ति करते हैं।
- वास्तविकता में न तो नालियों की सफाई हो रही है और न ही गार्बेज मैनेजमेंट।
- भुगतान लेने के बाद ठेकेदार क्षेत्र की अनदेखी कर रहे हैं।
मोहन कॉलोनी की बदहाल स्थिति
मोहन कॉलोनी के हालात इस लापरवाही को साफ दिखाते हैं।
- एसईसीएल मकानों के पीछे की नालियां पूरी तरह जाम हो चुकी हैं।
- नालियों के पास बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं।
- जगह-जगह गंदगी और बजबजाती नालियां बदबू और बीमारियों को खुला न्योता दे रही हैं।
महिलाओं का आक्रोश
मोहन कॉलोनी की महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं।
- उनका कहना है कि नालियों का गंदा पानी अक्सर घरों में घुस आता है।
- बार-बार शिकायत करने पर भी ठेकेदार टालमटोल करते हैं और “आज-कल करवा देंगे” कहकर बात टाल देते हैं।
- गंदगी के कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं और जीवन नारकीय बन गया है।
सवालों के घेरे में एसईसीएल प्रबंधन
लोगों का सीधा सवाल है कि जब करोड़ों रुपए स्वच्छता और सफाई पर खर्च के लिए दिए जा रहे हैं, तो आखिर इसका असर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा?
अब सबकी नजर इस पर है कि एसईसीएल चिरमिरी प्रबंधन और सिविल विभाग ऐसे लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ कब और कैसी कार्रवाई करता है।





